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बीमारजनों और गरीब बच्चों के उत्थान के लिए कर रहीं समाजसेवा

बेटियों को प्रगति और आत्मरक्षा के लिए जागरूक कर रहीं निशा उपाध्याय, महिलाओं का ग्रुप बनाकर परिवार में समरसता लाने के लिए भी किया काम...
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बीमारजनों और गरीब बच्चों के उत्थान के लिए कर रहीं समाजसेवा

भोपाल. समाजसेवा और सृजन के क्षेत्र में महिलाएं नए-नए अध्याय रच रही हैं। दूसरों की मदद के लिए बहुत बड़े बैनर या मंच की जरूरत नहीं होती, इसके लिए जमीनी स्तर पर भी लोगों की छोटी-छोटी मदद कर बड़ी मदद की जा सकती है।

शहर में कुछ महिलाओं ने गु्रप बनाकर समाजसेवा के विविध आयामों को साकार किया है। ये महिलाएं अपनी निजी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से समय निकालकर समाज के लिए कुछ न कुछ कार्य करती रहती हैं। उनके सामाजिक कार्य अभावग्रस्त और जरूरतमंद परिवारों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं।


नेहरू नगर निवासी निशा उपाध्याय ने समाजसेवा की राह में अकेले कदम रखा और इसके बाद उनके साथ अलग-अलग क्षेत्रों में जुडऩे व सहयोग करने के लिए महिलाएं आने लगीं। अब तक उनके साथ चार दर्जन से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। उन्होंने जमीनी स्तर से काम शुरू किया। जिन गरीब लोगों के परिजनों के पास इलाज कराने के लिए व्यवस्था नहीं होती थी, ऐसे आधा दर्जन परिवारों को मुख्यमंत्री के स्तर से सहयोग दिलवाया।

इसके लिए अपना समय और आवश्यक संसाधन भी उन्होंने लगाए। इसके साथ उन्हें लाने-ले जाने, दवाइयों से लेकर भोजन-वस्त्र आदि में भी मदद की। करीब दो दर्जन बच्चों को शिक्षा में भी मदद की।

उन्होंने महिलाओं का ग्रुप बनाकर परिवारों में सुख-सौहार्द बनाए रखने के तरीकों पर आपस में बातचीत करती हैं। विगत तीन वर्षों में उन्होंने अपने साथ कई महिलाओं को जोड़ा है। सामूहिक करवाचौथ आयोजन कर दाम्पत्य जीवन और परिवार में सुख-शांति लाने का प्रयास कर रही हैं।

वर्तमान समय की दौड़-धूप वाली जिंदगी में तनाव और समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी के चलते आएदिन पारिवारिक क्लेश के मामले सामने आते हैं। आपसी समझ और समंजस्य के अभाव में भी मामले बिगड़ जाते हैं।

ऐसे मामलों में परिवार को टूटने से बचाने के लिए दाम्पत्य में आ रहीं दरारों को भरने का प्रयास ये महिलाएं कर रही हैं। भागवत कथा और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में पारस्परिक मेलजोल बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। बेटियों को आत्मरक्षा के तरीके सिखाने के साथ-साथ उन्हें अधिकारों के प्रति सचेत किया जा रहा है