पानी की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त, एमपी नगर से लेकर होशंगाबाद रोड तक 60 से अधिक रिसाव

बड़े रिसाव दुरुस्त करने के नाम एक साल में पांच करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी नहीं रुकी बर्बादी

By: Sumeet Pandey

Published: 14 Sep 2021, 01:16 AM IST

भोपाल. जलापूर्ति करने वाली पानी की लाइनों में इन दिनों लीकेज की बारिश हो रही है। एमपी नगर से बाग मुगालिया, करोंद और अन्य क्षेत्रों में अभी 60 से अधिक लीकेज हैं। एमपी नगर में मनोहर डेयरी व अतिशय होटल के पास पानी की लाइन लंबे समय से लीकेज है। यहां अक्सर पानी सड़क पर बहता हुआ जमा हो जाता है। लीकेज को लेकर दुकानदार शिकातय तो करते हैं, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। यहां जलकार्य सहायक यंत्री नीतेश श्रीवास्तव, वार्ड के जलकार्य प्रभारी राजू सक्सेना से लेकर सहायक स्वास्थ्य अधिकारी किसी को नहीं है। कमोबेश सभी छोटे लीकेज में निगम के स्थानीय जिम्मेदारों की यही बेपरवाही है। लगातार रिसाव से रोजाना पांच लाख लीटर से अधिक पानी बेहार बह रहा है।

शिकायत की समय पर सुनवाई नहीं
बीआरटीएस सायकिल लेन के नीचे नर्मदा की लाइन, बागमुगालिया क्षेत्र सरिता सेतु के पास, जवाहर चौक पर पानी अक्सर बहता है। ज्योति बा फूले बस्ती में भी रहवासियों ने लीकेज की कई शिकायतें की, लेकिन सुनवाई नहीं और आखिर में लाइन फूटी, जिससे काफी नुकसान हुआ था।

अभियंताओं के लिए आमदनी का रास्ता
बीते एक साल के दौरान ही शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की लाइन में 42 बड़े लीकेज हुए। इन्हें सुधारने निगम के इंजीनियरों ने 5.04 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च की। एक बार लीकेज दुरूस्त कराने का खर्च 10 से 15 लाख रुपए तक बनता है।

प्रभार पर पानी, इसलिए दिक्कत
राजधानी में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से प्रभार और बाहरी लोगों के हाथ में है। यहां खुद चीफ इंजीनियर वाटर वक्र्स एआर पंवार संविदा नियुक्ति के तहत हर छह माह के एक्सटेंशन पर काम कर रहे। इन्हें पानी के साथ हाउसिंग फॉर ऑल का जिम्मा भी दिया गया है। इसी तरह जेडए खान व अन्य इंजीनियर प्रतिनियुक्ति पर लिए हुए हैं। प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बावजूद निगम में ही कार्यरत है। पीएचई से रिटायर्ड जलकार्य एक्सपर्ट आरबी राय का कहना है कि निगम में जलकार्य में एक्सपर्ट की जरूरत है। अन्य शाखाओं से जुड़े लोगों को पानी का जिम्मा दिया गया है।

जलापूर्ति की लाइनें काफी पुरानी है। लीकेज को दुरुस्त कराया जाता है। एमपी नगर में भी जर्जर लाइनें बदली जा रही हैं। कोलार की भी नई लाइन जल्द शुरू करेंगे तो संभव है लीकेज की समस्या दूर हो जाए।
केवीएस चौधरी, निगमायुक्त भोपाल

Sumeet Pandey Desk
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