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अयोध्या के रामलला के लिए भोपाल में बन रहा पुष्पक विमान

अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए हर कोई बेकरार है। देश—दुनिया की तरह एमपी में भी इस मौके पर जश्न की तैयारियां चल रहीं हैं। प्रदेश से लाखों लोग इस मौके पर अयोध्या जाएंगे। इसके लिए विशेष बस, ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं।
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भोपाल

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deepak deewan

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Updated: 3 Jan 2024, 2:54 PM IST

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रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए हर कोई बेकरार

अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए हर कोई बेकरार है। देश—दुनिया की तरह एमपी में भी इस मौके पर जश्न की तैयारियां चल रहीं हैं। प्रदेश से लाखों लोग इस मौके पर अयोध्या जाएंगे। इसके लिए विशेष बस, ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं।

इस शुभ अवसर पर प्रदेश से केवल बस, कार या ट्रेन ही अयोध्या नहीं जाएंगी बल्कि रामलला के लिए एक विशेष विमान भी जाएगा। यह विमान भी कोई साधारण विमान नहीं होगा। प्रदेश से रामलला के लिए पुष्पक विमान अयोध्या जा रहा है।

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एमपी की राजधानी भोपाल से अयोध्या जाने के लिए यह पुष्पक विमान खासतौर पर तैयार किया गया है। यहां हंस रूपी पुष्पक विमान की झांकी बनाई जा रही है। दरअसल अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए राजधानी की ‘डमरू टीम’ को विशेष रूप से बुलाया गया है। यही डमरू टीम
पुष्पक विमान तैयार कर रही है।

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अयोध्या बुलाई गई भोपाल की श्री बाबा बटेश्वर कीर्तन समिति यानि ‘डमरू टीम’ के अर्जुन सोनी ने बताया कि इस खास मौके पर हंस रूपी पुष्पक विमान की झांकी बनाई गई है। इस विमान में श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ हनुमानजी भी विराजमान रहेंगे। वाद्ययंत्रों के साथ यह झांकी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या जाएगी।

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क्यों खास है पुष्पक विमान
पुष्पक विमान एक वायु-वाहन था जिसका रामायण में उल्लेख किया गया है। लंका के राजा रावण ने इसे कुबेर से छीना था और सीताजी का हरण कर इसी विमान ले गया था। युद्ध में रावण को मारने के बाद श्रीराम, सीता व लक्ष्मण के साथ इसी विमान से लंका से अयोध्या वापस आए थे। इस विमान में कई विशेषताएं थीं, इसे छोटा या बड़ा किया जा सकता था। इसकी गति असीमित बताई गई।

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श्रीलंका की श्री रामायण रिसर्च समिति ने भी पुष्पक विमान के संबंध में कई खोजें की। समिति की रिसर्च में कहा गया है कि पुष्पक विमान के लिए रावण ने चार विमानक्षेत्र बनवाए जिनमें से एक उसानगोड़ा हवाई अड्डे को लंका दहन के समय हनुमानजी ने जलाकर खाक में मिला दिया था। पुष्पक विमान के लिए बने शेष तीन हवाई अड्डे गुरूलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला थे।

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