
Vindhya Pradesh reorganization demand: 1 नवंबर से राज्यभर में आंदोलन की घोषणा (फोटो सोर्स- Baghelkhand Vindhya Adarsh Samaj Facebook)
Vindhya Pradesh reorganization demand: विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन की मांग को लेकर बघेलखंड विंध्य आदर्श समाज 1 नवंबर से भोपाल में अनशन और सत्याग्रह शुरू करेगा। शुरुआत सुबह 11 बजे तुलसी नगर स्थित आंबेडकर पार्क में होगी। संगठन ने शुक्रवार को अभियान की जानकारी देते हुए नौ सूत्रीय मांगें रखीं। प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी सूरज ने बताया कि 31 अक्टूबर 1956 की रात तत्कालीन विंध्य प्रदेश का मप्र में विलय होने से क्षेत्र की राजनीतिक पहचान गुम हो गई है, जबकि पूर्व में इसे सी-स्टेट के तौर पर आधिकारिक रूप से राज्य का दर्जा का मिला था।
अब इसी खोई हुई पहचान की वापसी को लेकर संगठन मैदान में है और बघेलखंड-बुंदेलखंड के जिलों को मिलाकर अलग विंध्य प्रदेश बनाने तथा नई राजधानी घोषित करने की मांग कर रहा है। साथ ही बघेली-बुंदेली को संवैधानिक मान्यता देने, प्राथमिक शिक्षा और प्रशासन में इन भाषाओं का उपयोग, अंतरराष्ट्रीय खेल अकादमी, रीवा मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों का उन्नयन तथा स्थानीयों को 75 प्रतिशत रोजगार में प्राथमिकता जैसी मांगे शामिल हैं।
इसके अलावा प्रस्तावित रीवा परमाणु संयंत्र रद्द करने, बक्सवाहा जंगल की कटाई रोकने, सिंगरौली की प्रदूषण समस्याओं का समाधान और खनिज राजस्व में स्थानीय हिस्सेदारी की भी मांग शामिल है। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष राजेश उपाध्याय और महासचिव ज्ञानेंद्र दुबे ने राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में इन मांगों को शामिल करने की मांग की है।
बता दें, स्वतंत्रता सेनानी पंडित शंभूनाथ शुक्ल साल 1952 के आम चुनाव के बाद विंध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने थे। देश के पहले आम चुनाव में विंध्य प्रदेश में कांग्रेस को 60 सीटें जीती थी और शुक्ल को निर्विरोध मुख्यमंत्री चुना गया था। उन्ही के नेतृत्व में सरकार चुनी गई और 1956 में मध्य प्रदेश का जब गठन हुआ, जिसमें शंभूनाथ शुक्ल को मध्य प्रदेश का प्रथम वन मंत्री नियुक्त किया गया था।
Updated on:
31 Oct 2026, 7:18 AM IST
Published on:
31 Oct 2026, 7:18 AM IST
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