
श्रीराम वन गमन पथ
अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है जहां रामलला की मूर्तियों को विराजित किया जा रहा है। देश दुनिया में 22 जनवरी को होनेवाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर जश्न की तैयारियां की जा रहीं हैं। एमपी भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर जबर्दस्त उत्साह दिख रहा है।
एमपी से राम का सीधा नाता रहा, वनवास के दौरान वे यहां के कई स्थानों पर रुके। अयोध्या से श्रीराम जिस रास्ते से होते हुए लंका पहुंचे उसे श्रीराम वन गमन पथ (Ram Van Gaman ) का नाम दिया गया है। श्रीराम एमपी के जिस मार्ग से होते हुए दक्षिण भारत पहुंचे थे, उसे राज्य सरकार संवार रही है।
इसके लिए पिछली सरकार में श्रीरामचन्द्र वन गमन पथ न्यास को मंजूरी दी गई थी। वनवास के दौरान भगवान राम सबसे ज्यादा दिन चित्रकूट में रहे। यहां इसकी कई निशानियां भी हैं। एमपी और यूपी की सीमा पर बसा चित्रकूट एमपी में श्रीराम वन गमन पथ (Ram Van Gaman Marg) का मुख्य हिस्सा है।
दरअसल एमपी में श्रीराम की यात्रा चित्रकूट से ही शुरू हुई। यहां श्रीराम कामतानाथ मंदिर चित्रकूट से राम स्फटिक शिला और गुप्त गोदावरी के बाद सती अनुसुइया के आश्रम में पहुंचे थे। चित्रकूट, सतना होते हुए श्रीराम, पन्ना के सलेहा मंदिर, मैहर, कटनी बड़वारा होते हुए जबलपुर के पास शाहपुरा पहुंचे। जबलपुर के ग्वारी घाट से गुजरे।
इसके बाद सतना जिले के तालाधाम से होते हुए शहडोल के सीतामढ़ी पहुंचे और फिर यहां से अमरकंटक पहुंच गए। इस प्रकार राम के वनवास की सबसे ज्यादा लीला एमपी में ही हुई। यही कारण है कि प्रदेश में चित्रकूट से अमरकंटक तक करीब 370 किलोमीटर का राम वन गमन पथ है।
चित्रकूट में ही राजा भरत, श्रीराम को मनाने आए थे। यहां से राम एमपी के सतना, पन्ना, शहडोल,जबलपुर,कटनी,अनूपपुर, रीवा आदि के घने जंगलों में रुकते हुए दंडकारण्य चले गए थे। रामायण में इस बात का उल्लेख है कि राम ने वनवास का ज्यादातर समय दंडकारण्य में बिताया था।
राम वन गमन वथ न्यास अब इन जगहों का नए सिरे से विकास कर रहा है। वनवास के वक्त राम जहां से गुजरे और जहां रुके, वहां के सभी प्रमुख स्थलों को विकसित कर तमाम सुविधाएं जुटाई जा रही हैं।
Published on:
08 Jan 2024 06:47 pm
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