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क्या शिवराज सिंह चौहान होंगे भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष? बयान से सियासी गलियारों में हलचल तेज

BJP National President: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सियासी गलियारों में शिवराज सिंह चौहान के नाम की चर्चा तेजी से हो रही है।
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भोपाल

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Himanshu Singh

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Updated: 21 Jul 2025, 7:00 PM IST

bjp national president

फोटो- पत्रिका

BJP National President: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश अगले महीने यानी अगस्त में पूरी हो सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। जिसमें पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के साथ-साथ शनिवार से एक शख्स की चर्चा राजनीति गलियारों में तेजी से हो रही है। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं।

शिवराज सिंह चौहान से एक पॉडकास्ट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दावेदारी के बारे में पूछा गया। जिसमें उन्होंने जवाब दिया कि जब आप एक बड़े मिशन, एक बड़े उद्देश्य का हिस्सा होते हैं, तो आप अपने बारे में कैसे तय कर सकते हैं कि मैं यह काम करूंगा? फिर वह बड़ा मिशन तय करेगा कि आप कहां काम करोगे।"

शिवराज बन पाएंगे अगले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष?

राजनीतिक सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए शिवराज सिंह चौहान का नाम पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने आगे किया है। इधर, संघ की तरफ से शिवराज सिंह चौहान का फीडबैक अच्छा है। इस रेस में कई उम्मीदवार हैं, मगर शिवराज इस रेस में कहीं आगे नजर आ रहे हैं। खैर, यह तो महज चर्चा है। फिलहाल, बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इसका फैसला तो पार्टी आलाकमान ही करेगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष की राह आसान नहीं

केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान 4 बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवराज की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राहें बिल्कुल आसान नहीं हैं। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को बंपर जीत मिली। मगर शिवराज को सीएम नहीं बनाया गया। इसके बाद उस दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से खटपट की खबरें भी सामने आई थीं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर कई बार बयान दे चुके हैं शिवराज

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह कई बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बयान दे चुके हैं। उन्होंने ग्वालियर में कहा था कि अब दिल्ली धूमधाम से जा रहा हूं। ये भी सुन लेना खाली पीली सांसद नहीं, पिक्चर अभी बाकी है। बहुत काम करना है अभी। एक इंटरव्यू में राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान पर उन्होंने कहा था कि सपने मैं कभी नहीं देखता, पार्टी जहां उपयुक्त समझती हैं, वहां काम देती है।

संगठन कार्य का अनुभव रखते हैं शिवराज

शिवराज सिंह चौहान जब भाजपा पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य रहे हैं। वह साल 2019 में पार्टी के सदस्यता अभियान के प्रमुख थे। इस दौरान बीजेपी सदस्य संख्या बढ़कर साढ़े 18 करोड़ से अधिक हुई थी। उनके पास बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, एमपी प्रदेशाध्यक्ष, एमपी बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष, भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

लाड़ली बहना योजना जैसी सुपरहिट योजना से कराई वापसी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साल 2023 विधानसभा चुनावों में बीजेपी नैय्या पार लगाने वाले शिवराज सिंह चौहान ही हैं। अगर वह योजना उन्होंने न शुरु की होती तो बीजेपी आज मध्यप्रदेश की सरकार न चला रही होती। सूबे में ऐसी चर्चाएं होती रहती हैं कि पूरे चुनाव में कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेल रही थी। लाड़ली बहना के खातों किस्त जाते ही हवा का रूख बदलने लगा था। धीरे-धीरे चुनाव नजदीक आए बीजेपी ने रिकवरी कर ली थी, लेकिन उन्हें सत्ता में वापसी करने का यकीन नहीं था। चर्चाएं तो यह भी थी कि बीजेपी मात्र 10-15 सीटों से चुनाव हारेगी। इससे कम मार्जिन नहीं हो सकता। मगर दिन 3 दिसंबर का आया। नतीजों ने तस्वीर ऐसी साफ की सबके होश उड़ गए। ये जादू था लाड़ली बहना योजना का। जिसके तूफान में कांग्रेस की पूरी नींव हिल गई।

13 साल की उम्र में संघ से जुड़े शिवराज

शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959 में जैत गांव में हुआ था। किसान परिवार में जन्मे शिवराज सिंह चौहान का आरएसएस से पुराना नाता रहा है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही हुआ था। तब वह मात्र 13 साल के थे। वह साल 1975 में मॉडल हायर सेकेंड्ररी स्कूल का छात्र संघ चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने थे।

परिवार नहीं चाहता था कि राजनीति करें शिवराज

बताया जाता है कि शिवराज सिंह चौहान के राजनीति में कदम रखने पर परिवार के लोग खुश नहीं थे। उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के लिए आंदोलन किया था। विपक्षी दल कांग्रेस ने उनके ऊपर व्यापम घोटाले का आरोप भी लगाया था। जिसमें सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट दे दी थी।

क्या है बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का क्राइटेरिया

बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कम से कम व्यक्ति को 15 वर्षों तक प्राथमिक सदस्य रहना जरूरी है। बीजेपी के संविधान की धारा-19 के तहत निर्वाचक मंडल में से कुल 20 सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की योग्यता रखने वाले व्यक्ति ने नाम पर प्रस्ताव रख सकते हैं।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी अक्सर अपने हैरान कर देने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है। फिर वो चाहे मध्यप्रदेश में सीएम बनाने का चयन हो या फिर पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी देनी हो। बीजेपी इन मामलों हमेशा से अलग दांव खेलती आई है। जिससे वह कई बार विपक्ष को पटखनी देने में कामयाब भी रही है।