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बीकानेर शहर में दिवाली पर होता है ये आग का साहसिक खेल बन्नाटी

पारम्परिक खेल जीवन में खुशियां तथा उल्लास के साथ नया जोश भर देते हैं। साथ ही आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ाते हैं।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 17 Oct 2017, 11:27 AM IST

 adventure game

साहसिक खेल

विमल छंगाणी/बीकानेर. पारम्परिक खेल जीवन में खुशियां तथा उल्लास के साथ नया जोश भर देते हैं। साथ ही आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ाते हैं। ऐसे ही दीपावली के दिन बीकानेर के बारह गुवाड़ चौक प्रांगण में दीपोत्सव खेल 'बन्नाटी' का आयोजन होता है। यह खेल दशकों से कलात्मक प्रदर्शन और खिलाडिय़ों के साहसिक दमखम से ख्याति बनाए हुए है। आग के इस खेल से दर्शक रोमांचित हो जाते हैं। इस वर्ष दीपावली पर 19 अक्टूबर की रात को इसका आयोजन होगा।

दीपावली की रात को होने वाले 'बन्नाटीÓ खेल को देखने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। इसमें उम्दा प्रदर्शन करने के लिए युवा हफ्तों पूर्व वरिष्ठ खिलाडिय़ों के निर्देशन में इसका अभ्यास करते हैं। प्रतिवर्ष सात बन्नाटियों के माध्यम से इस खेल का साहसिक प्रदर्शन होता है। इस दौरान सामूहिक रूप से गाए जाने वाले 'बोलो वाह बन्नाटी वाह' गीत से पूरा प्रांगण गूंज उठता है।

इनसे बनती है 'बन्नाटी'
'बन्नाटी' बनाने में मुख्य रूप से बांस की लकडिय़ों, सूती वस्त्र, मूंगफली के तेल का उपयोग होता है। लोहे की चद्दर, छोटी कील, लोहे का पतला वायर, सफेद मिट्टी भी 'बन्नाटी' तैयार करने के काम में ली जाती है।

ऐसे तैयार होती है बन्नाटी
छह फुट की एक बांस की लकड़ी के दोनों सिरों पर करीब एक-एक फुट तक लोहे की चद्दर को कील की सहायता से गोलाई में लगाया जाता है। वरिष्ठ खिलाड़ी ईश्वर महाराज के अनुसार सूती धोती से 'कोडे' तैयार किए जाते हैं। इन कोडों को छह या आठ की संख्या में बांस की लकड़ी के दोनों आेर कील तथा वायर के माध्यम से बांध दिए जाते हैं।
तैयार बन्नाटी को करीब 36 घण्टे तक तेल में भिगोकर रखा जाता है। बाद में इसे तेल निकलने के लिए छोड़ दिया
जाता है व दोनों ओर सफेद मिट्टी का लेप किया जाता है। 'बन्नाटी' के दोनों आेर आग जलाकर प्रदर्शन किया जाता है।

कलात्मक खेल प्रदर्शन
'बन्नाटी' को देखने के लिए लोग वर्ष भर इंतजार करते है। 'बन्नाटी' के दोनों और जलती हुई आग के गोले, इसको घुमाने के दौरान निकलने वाली सर-सराहट की आवाज तथा हैरतअंगेज प्रदर्शन को देख हर कोई रोमांचित हो उठता है। बच्चों से बुजुर्ग तक एक के बाद एक सात बन्नाटियों के माध्यम से 'बन्नाटी' को अपने शरीर के दाएं भाग से बाईं ओर, सिर के उपर से, पांवों के नीचे से निकालकर कई तरह के साहसिक एवं कलात्मक प्रदर्शन करते हैं।