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विवाह शादियों में आमतौर पर भोज में प्रतिष्ठा की प्रतीक सांगरी का अब व्यावसायिक उत्पादन

विवाह शादियों में आमतौर पर भोज में प्रतिष्ठा की प्रतीक मानी जाने वाली सब्जी सांगरी का अब व्यावसायिक उत्पादन हो सकेगा।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 7 May 2018, 9:34 AM IST

Sangri commercial production

सांगरी का व्यावसायिक उत्पादन

बीकानेर . विवाह शादियों में आमतौर पर भोज में प्रतिष्ठा की प्रतीक मानी जाने वाली सब्जी सांगरी का अब व्यावसायिक उत्पादन हो सकेगा। अगले वर्षों में सांगरी महंगी नहीं, बल्कि आम सब्जियों के भाव मिल सकती है। इसके लिए केन्द्रीय शुष्क उद्यानिकी संस्थान, बीकानेर ने खेजड़ी की विश्व में पहली प्रजाति 'थार शोभाÓ विकसित की है।

इसके ४० हजार पौधे स्वस्थानिक कलिका से तैयार किए गए हैं। खेजड़ी की यह किस्म सांगरी के व्यावसायिक उत्पादन लिए तैयार की गई है। केन्द्र ने भी 'थार शोभाÓ से सांगरी का उत्पादन लेना शुरू कर दिया है। मरुस्थल का कल्पवृक्ष मानी जानी वाली खेजड़ी की 'थार शोभाÓ किस्म खेतों में फसलों के साथ लगाई जा सकती है।

बडिंग से तैयार इसका पौधा लगाने के तीन से चार साल बाद संागरी देने लगता है। इसकी ऊंचाई अपेक्षकृत कम होती है। सांगरी लगने के २० से २१ दिनों में इसे तोड़ा जाए तो सब्जी के लिए गुणवत्ता की फली मिल जाती है।

अलग सिंचाई की जरूरत नहीं
संस्थान काश्तकारों को खेतों में खेजड़ी के बीज डालकर पौधे उगाने और इसमें 'थार शोभाÓ किस्म की बडिंग करने का प्रशिक्षण भी दे रहा है। केन्द्र में भी इसकी पौध उपलब्ध है। काश्तकार अपने खेतों में फसलों के साथ निश्चित दूरी पर दो पंक्तियों में व्यावसायिक उत्पादन के लिए इसे उगा सकते हैं। ऐसे में खेजड़ी को अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। खेजड़ी से तोड़ी गई सांगरी को छाया में कपड़े से ढंककर सुखाने और इसकी ग्रेडिंग कर बाजार में बेचने से काश्तकारों को अच्छी आमदनी हो सकेगी।

तीन-चार साल में लगती फली
संस्थान जिन फसलों पर अनुसंधान कार्य कर रहा है, उनमें से विश्व में पहली बार किसी प्रजाति को विकसित किया गया है। इनमें फसलों में खेजड़ी की 'थार शोभाÓ किस्म है। प्राकृतिक रूप से खेजड़ी को फली देने में वर्षों लगते हैं। नई प्रजाति तीन से ४ वर्ष में फली देने लगती है।
डॉ. पीएल सरोज, निदेशक , केन्द्रीय शुष्क उद्यानिकी संस्थान बीकानेर