CG Analytical Story लोक सुराज में किसान का आवेदन, सीएम साहब 2 मीटर रस्सी दे दो, फांसी लगा लूं

CG Analytical Story लोक सुराज में किसान का आवेदन, सीएम साहब 2 मीटर रस्सी दे दो, फांसी लगा लूं

Amil Shrivas | Publish: Jan, 13 2018 09:27:45 PM (IST) | Updated: Jan, 19 2018 10:47:05 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

लोक सुराज अभियान के लिए मंगाए जा रहे आवेदनों में एक किसान ने मुख्यमंत्री से फांसी लगाने के लिए दो मीटर रस्सी मांगी है।

बिलासपुर . 15 जनवरी से शुरू से शुरू हुए लोक सुराज अभियान के लिए मंगाए जा रहे आवेदनों में एक किसान ने मुख्यमंत्री से फांसी लगाने के लिए दो मीटर रस्सी मांगी है। मामला बिलासपुर का है, जहां के एक ग्रामीण दिलहरण भार्गव ने अपने आवेदन में लिखा है कि मुख्यमंत्री जी मेरे पुरखों की जमीन को वन विभाग ने यह कहकर हथिया लिया कि मुझे कहीं और जमीन दे दी जाएगी, लेकिन बाद में मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही। यहां तक कि मुख्यमंत्री जी आपके लोकसुराज में भी।

2013 में हड़पी जमीन, 2015 से मांग रहा इंसाफ - किसान भार्गव की जमीन खसरा नंबर 1/2 ग 2/5. एक एकड़ 1 डिसमिल को वन विभाग ने साल 2013 में ले लिया था। इसके बदले में दूसरी जगह उतनी ही जमीन देने का वादा भी किया था। मगर आज तक न तो जमीन मिली न मुआवजा। इसे लेकर किसान भार्गव ने साल 2015 में भी लोक सुराज (नगर सुराज) में अपना आवेदन लगाया था। इसका नंबर 12073112140012 है। लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकला। ऐसे लोक सुराज का क्या मतलब जिसमें आप ढोल तो खूब बजाते हो, मगर समाधान नहीं कर पाते।

2017 में भी लोकसुराज में दिया आवेदन - किसान ने अपने आवेदन में लिखा है कि साल 2017 में भी उसने लोकसुराज के तहत इंसाफ के लिए गुहार लगाई थी। इसका आवेदन नंबर 317073121400253 था। मगर इसके बाद भी सरकार के सिर पर जूं नहीं रेंगा।

समाधान नहीं कर सकते तो फांसी लगाने रस्सी दे दो - किसान दिलहरण भार्गव ने अपने आवेदन में अंतिम लाइन में लिखा है कि अगर शासन उनकी समस्या को सुन भी नहीं सकता और समाधान भी नहीं करना चाहता तो मुख्यमंत्री जी कम से कम 2 मीटर रस्सी तो दे ही दीजिए, ताकि किसान फांसी लगाकर अपनी जान दे सके।

अफसर करते हैं मनमानी, सो रहे हैं मुख्यमंत्री - सभी दस्तावेजों के साथ किसान ने बार-बार गुहार लगाई है। लेकिन इसे लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया। कांग्रेस नेता शैलेष पांडे कहते हैं कि सरकार के मुखिया सो रहे हैं। उन्हेें लोगों की जरा भी चिंता नहीं है। किसान परेशान हीं।

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