फिल्म अभिनेता सोनू सूद बुधवार को पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब दे रहे थे। शो का मॉडरेशन पत्रिका के संदीप पुरोहित और जितेंद्र पालीवाल ने किया। सोनू सूद ने विभिन्न राज्यों के करीब एक लाख प्रवासियों को रेल, बस, हवाईजहाज से लोगों को घर पहुंचाने का ख्याल कहां से आया, इस सवाल पर कहा कि जब सड़कों पर लोगों को पैदल चलते देखा, तो अपने पैतृक स्थान मोगा (पंजाब) में पिता की कपड़ों की दुकान के पास गुरुद्वारे में चलते लंगर का दृश्य याद आया। वहीं से मदद की हूक उठी। मैं अकेला चल पड़ा, तो मेरे साथ और लोग जुड़ते चले गए। फिल्म इण्डस्ट्री में और बाहर मेरे ऐसे कई दोस्त हैं, जिन्होंने मदद की पेशकश की। उन्होंने पूरी बस का खर्च भी उठाया। सोनू ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर राज्य में हमने करीब एक लाख प्रवासियों और जरूरतमंदों को घर भिजवाया। यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। जब हाथ में लिया तो लोग जुड़े और हौसला बढ़ता गया। मुश्किलें भी आईं। अनजान लोगों को चिह्नित करना, गाइडलाइन के मुताबिक सरकारी एजेंसियों से तालमेल रखते हुए इजाजत लेना चुनौतीपूर्ण था। बस, खाना-पानी, दवा का इंतजाम और तमाम चीजों का और अलग है। कई बार पूरा बंदोबस्त करने के बाद सरकारी एजेंसियों की गाइडलाइन ही बदल जाती थी, लेकिन हर एजेंसी के लोगों ने पूरा सहयोग किया। क्योंकि वे भी जानते थे, हमारी टीम कितनी जद्दोजहद कर रही है लोगों को घर पहुंचाने के लिए।