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स्वतंत्र भारद्वाज के वकील का बड़ा बयान, बोले- झूठे केस में 11 दिन से जेल में हैं, इससे बड़ा संविधान का अपमान क्या होगा

Swatantra Bhardwaj Lawyer Statement: जंतर-मंतर पर हुई मारपीट की घटना के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच आरोपी के वकील उमेश शर्मा ने जांच प्रक्रिया पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए। जानिए उन्होने क्या-कुछ कहा...
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बुलंदशहर

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Mohsina Bano

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Updated: 15 Sep 2026, 11:34 AM IST

Swatantra Bhardwaj news

स्वतंत्र भारद्वाज। फोटो-ANI

Swatantra Bhardwaj Case: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता के मारपीट की घटना और एससी/एसटी एक्ट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच आरोपी के वकील उमेश शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वकील का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से झूठा है। उनके मुवक्किल को सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया है।

बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी

आपको बता दें कि स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली निशु आजाद के पिता के साथ हुई मारपीट के इस मामले में पुलिस ने बाद में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी थीं। आरोपी पक्ष ने पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी जिसके बाद वकीलों ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी हालांकि कोर्ट ने नियमित सुनवाई के तहत दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

वकील उमेश शर्मा ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

वकील उमेश शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जैसा कि वह लगातार कहते आ रहे हैं दूसरा पक्ष अदालत में यह तर्क दे रहा है कि, स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। यह हमारे संविधान और न्याय-व्यवस्था का बहुत बड़ा अपमान है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल पिछले 11 दिनों से जेल में बंद हैं जबकि यह मामला पूरी तरह से फर्जी है। FIR 13 जून को दर्ज की गई थी और जांच अधिकारी से नोटिस मिलने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने लगातार जांच में पूरी तरह सहयोग किया था।

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

वकील ने आगे आरोप लगाया कि 3 सितंबर को संसद स्ट्रीट पर कुछ नेताओं के प्रदर्शन करने और सोशल मीडिया पर भारी दबाव बनाने के बाद पुलिस ने अचानक अपनी दिशा बदली। पुलिस ने अचानक जातिवादी टिप्पणियों का आरोप जोड़कर एक पूरक बयान दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। चूंकि यह अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ा मामला है इसलिए बचाव पक्ष ने नामित अदालत में जमानत याचिका दायर की थी जहां न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है जबकि दूसरा पक्ष लगातार इस बात पर अड़ा है कि आरोपी को जमानत न मिले।

पॉडकास्ट में स्वतंत्र ने खुद मानी थी हमले की बात

बता दें कि एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र कहता नजर आया था कि उसने निशु आजाद के पिता के सिर पर हमला किया था। जिसके बाद उन्हें 7 टांके लगे थे। उसने यह भी कहा था कि वह राजनीतिक पहुंच की वजह से बच गया। वीडियो वायरल होने के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद निशु के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पुहंचे थे और स्वतंत्र की गिरफ्तारी और एससी/एसटी एक्ट की धारा जोड़ने की मांग की थी। इसके बाद स्वतंत्र को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया गया था और फिर कुछ घंटों के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।