मान्यता है कि इस दिन शीतला जल का पान शुरू हो जाता है। शीतला का व्रत रखने से दाद ज्वर खुजली फोड़े, नेत्र के समस्त रोग सर्वदोष से दूर होते है। शीतला माता की महत्ता के विषय में स्कंद पुराण में विस्तृत वर्णन मिलता है। ् इसमें उल्लेख है कि शीतला देवी का वाहन गर्दभ है, ये हाथों में कलश, सूप, मार्जन ,झाड़ू और नीम के पत्ते धारण किये है, इनका प्रतीकात्मक महत्व है।