बूंदी. ब्लड प्रेशर बढऩे व हृदय रोग पीडि़त को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) तक पहुंचाते-पहुंचाते तो परिजन भी लडखड़़ाने लगते हैं। यहां जिला अस्पताल में मरीज का तो क्या हाल होता होगा, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, सांसें उखडऩे लगती है। ऐसा लगता है जैसे शरीर से प्राण निकलने वाले हैं। हांफते-हांफते जैसे-तैसे आईसीयू तक पहुंचना रोगियों की जान पर बन जाता है। आईसीयू में उपचार के लिए रोगियों को अपनी जान संकट में डालनी पड़ रही है। यह हाल जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के हैं। जहां जीवन देने वाली आपातकालीन इकाई (आईसीयू) ही जानलेवा साबित होने लगी है। यहां पर आईसीयू की सुविधा लोगों के लिए दुविधा बन चुकी है। या फिर यूं कहें की भवन का विस्तार होने के बाद अस्पताल आईसीयू अंतिम छोर पर स्थापित हो गया। जहां पर गंभीर रोगियों का आसानी से पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कई बार तो आईसीयू तक पहुंचने के दौरान ही रोगी की मौत तक हो जाने के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसे में आमजन आईसीयू यूनिट की दूरी को हर समय कोसता रहता है। फिर भी चिकित्सा महकमे का इस ओर कोई ध्यान नहीं जा रहा।