
EPS Service History ट्रांसफर न करवाने से पेंशन प्रभावित हो सकती है। (PC: AI)
How to Transfer EPS Service History: अगर आपने नौकरी बदल ली है और पुराना PF अकाउंट बंद करके पैसा भी निकाल लिया है, तो यह मत मानिए कि सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है। कई कर्मचारी यहीं सबसे बड़ी चूक कर बैठते हैं। इस गलती का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर सीधा असर पड़ सकता है। असल में नौकरी बदलने के दौरान लोग EPF यानी प्रोविडेंट फंड पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर महंगी पड़ सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने पुरानी कंपनी का पूरा PF बैलेंस निकाल लिया है, तब भी एक जरूरी काम बाकी रहता है। आपको अपनी EPS सर्विस हिस्ट्री नए अकाउंट में ट्रांसफर करनी होती है। दरअसल EPF और EPS एक ही PF अकाउंट से जुड़े होते हैं, लेकिन दोनों का काम अलग-अलग है। EPF आपकी बचत का हिस्सा है, जिसे कुछ शर्तों के तहत निकाला जा सकता है। वहीं EPS आपकी नौकरी के वर्षों का रिकॉर्ड भी रखता है और इसी आधार पर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन तय होती है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, PF निकासी के समय केवल बचत वाला हिस्सा कर्मचारी को मिलता है। EPS का रिकॉर्ड पुराने मेंबर आईडी के साथ बना रहता है। इसलिए इसे अलग से ट्रांसफर करना जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो नौकरी के कुछ साल रिकॉर्ड से अलग हो सकते हैं और अंतिम पेंशन कम हो सकती है। जितने ज्यादा साल आपकी पेंशन योग्य सेवा अवधि होगी, उतनी बेहतर पेंशन मिलने की संभावना रहेगी। ऐसे में अगर किसी नौकरी की EPS सर्विस हिस्ट्री नए खाते से नहीं जुड़ती, तो वह अवधि पेंशन की गणना में शामिल नहीं हो सकती।
मामला सिर्फ रिकॉर्ड का नहीं है। EPS के नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन पाने के लिए आमतौर पर कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा जरूरी होती है। अगर नौकरी बदलने के दौरान कई बार EPS ट्रांसफर नहीं किया गया, तो आपकी सेवा अवधि अलग-अलग हिस्सों में बंट सकती है। ऐसे में पात्रता और पेंशन राशि दोनों प्रभावित हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि PF बैलेंस शून्य होने पर भी EPS सर्विस हिस्ट्री ट्रांसफर की जा सकती है।
स्टेप 1. EPFO पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर जाएं।
स्टेप 2. अपने UAN और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें।
स्टेप 3. Online Services पर क्लिक करें।
स्टेप 4. अब Transfer Request पर क्लिक करें।
स्टेप 5. अब Transfer Request (Form 13) विकल्प चुनें।
स्टेप 6. वह पुरानी पीएफ मेंबर आईडी भरें जिसमें आपकी EPS सर्विस हिस्ट्री दर्ज है।
स्टेप 7. अपने वर्तमान नियोक्ता या मौजूदा PF संस्थान को ट्रांसफरी एस्टैब्लिशमेंट के रूप में चुनें।
स्टेप 8. सत्यापन के लिए पुराने या वर्तमान नियोक्ता में से किसी एक का चयन करें। आमतौर पर वर्तमान नियोक्ता के माध्यम से प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है।
स्टेप 9. फॉर्म 13 की रिक्वेस्ट सबमिट कर दें।
स्टेप 10. आवेदन मंजूर होने के बाद आपकी EPS सर्विस हिस्ट्री मौजूदा अकाउंट से जुड़ जाएगी। "Track Transfer Request" विकल्प में जाकर आवेदन की स्थिति चेक कर सकते हैं।
EPS ट्रांसफर के दौरान कुछ सामान्य गलतियां भी लोगों को परेशान करती हैं। UAN में नाम या जन्मतिथि की गलती, KYC अपडेट न होना, पुरानी कंपनी द्वारा एग्जिट डेट अपडेट न करना और रिकॉर्ड में जानकारी का मेल न खाना सबसे आम कारण हैं, जिनकी वजह से ट्रांसफर अटक सकता है। फॉर्म 13 जमा करने से पहले कर्मचारियों को अपना UAN रिकॉर्ड, KYC और नौकरी से जुड़ी जानकारी जरूर चेक कर लेनी चाहिए। छोटी सी गलती भी पूरी प्रक्रिया को लंबा खींच सकती है।
अगर पुरानी कंपनी ने आपकी एग्जिट डेट अपडेट नहीं की है, तो सबसे पहले उससे संपर्क करें। यदि इसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो ईपीएफओ में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस दौरान अपॉइंटमेंट लेटर, रिलीविंग लेटर और सैलरी स्लिप जैसे दस्तावेज मददगार साबित होते हैं।
आप समय-समय पर अपनी सर्विस हिस्ट्री चेक कर सकते हैं। EPFO पोर्टल पर View सेक्शन में जाकर Service History विकल्प से यह देखा जा सकता है कि आपकी सभी नौकरियां UAN से जुड़ी हुई हैं या नहीं। अगर किसी कंपनी का नाम या नौकरी की अवधि वहां दिखाई नहीं दे रही है, तो समझिए कि रिकॉर्ड में गैप है और उसे जल्द से जल्द Form 13 के जरिए ठीक कराना चाहिए। कई कर्मचारियों की पुरानी नौकरी का रिकॉर्ड 2014 से पहले का भी हो सकता है, जब UAN सिस्टम लागू नहीं हुआ था। ऐसे मामलों में संबंधित EPFO कार्यालय में जाकर पुराने PF दस्तावेजों की मदद से रिकॉर्ड को मैन्युअली जुड़वाया जा सकता है।
Published on:
05 Jun 2026 01:42 pm
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