
कंपनी द्वारा काटा गया टीडीएस कुल टैक्स देनदारी से अधिक है, तो रिफंंड लिया जा सकता है। (PC: AI)
TDS On Salary: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने कटने वाला TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) किसी तय प्रतिशत के हिसाब से नहीं काटा जाता। साथ ही TDS कटौती का प्रतिशत हर कर्मचारी के लिए एक जैसा नहीं होता है। कंपनी पहले पूरे वित्त वर्ष की आपकी अनुमानित आय, टैक्स छूट और कटौतियों का हिसाब लगाती है। इसके बाद सालभर की कुल टैक्स देनदारी को महीनों में बांटकर हर महीने TDS काटा जाता है।
कर्मचारी की सैलरी से TDS काटने का मकसद यह है कि सरकार को पूरे साल नियमित रूप से टैक्स मिलता रहे। इससे कर्मचारी को भी फायदा होता है, क्योंकि आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय एक साथ बड़ी रकम टैक्स के रूप में नहीं चुकानी पड़ती।
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना के अनुसार, कंपनी सबसे पहले कर्मचारी की पूरे वित्त वर्ष की अनुमानित टैक्स योग्य आय का आकलन करती है। इसमें बेसिक सैलरी, भत्ते, बोनस, टैक्स योग्य सुविधाएं (Perquisites) और अन्य लाभ शामिल किए जाते हैं। इसके बाद कर्मचारी द्वारा घोषित और दस्तावेजों के जरिए साबित की गई टैक्स छूट एवं कटौतियों को ध्यान में रखा जाता है। इनमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA), आयकर अधिनियम की धारा 80C, 80D जैसी कटौतियां और जहां लागू हो वहां धारा 87A के तहत मिलने वाली रिबेट शामिल होती है।
सभी छूट और कटौतियां घटाने के बाद कंपनी पूरे साल की टैक्स देनदारी तय करती है। इसके बाद इस कुल टैक्स राशि को बचे हुए महीनों में बराबर बांट दिया जाता है। इसी आधार पर हर महीने TDS काटा जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की सालभर की अनुमानित टैक्स देनदारी 1.20 लाख रुपये है और पूरे 12 महीने बाकी हैं, तो कंपनी हर महीने करीब 10,000 रुपये TDS के रूप में काट सकती है।
कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए घर, कार सुविधा या शेयर आधारित मुआवजा जैसी टैक्स योग्य गैर-नकद सुविधाओं को भी TDS की गणना में शामिल किया जा सकता है। इससे कर्मचारी की कुल कर योग्य आय का सही आकलन हो पाता है।
यदि किसी कर्मचारी ने वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है या एक से अधिक एम्पलॉयर से आय प्राप्त की है, तो वह अपने पुराने एम्पलॉयर की सैलरी और कटे हुए टैक्स का विवरण नए नियोक्ता को दे सकता है। इससे नया नियोक्ता सही TDS काट सकेगा और बाद में टैक्स की कमी या अधिक कटौती की स्थिति से बचा जा सकेगा।
सुरेश सुराना के अनुसार, यदि वर्ष के शुरुआती महीनों में TDS कम या ज्यादा कट गया हो, तो कंपनी को उसी वित्त वर्ष के बाकी महीनों में TDS बढ़ाने या घटाने की अनुमति होती है। इससे साल के अंत तक कुल टैक्स कटौती को सही स्तर पर लाया जा सकता है।
Updated on:
25 Jun 2026 11:10 am
Published on:
25 Jun 2026 11:10 am
