27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

VPF Calculator: PF के अलावा हर महीने 5000 रुपये एक्स्ट्रा कटवाकर 20 साल में जुटा सकते हैं 30 लाख रुपये, समझिए कैलकुलेशन

Provident Fund Calculator: ईपीएफ में नियमित योगदान के अलावा कर्मचारी वीपीएफ के जरिए रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत कर सकते हैं। हर महीने 5,000 रुपये अतिरिक्त जमा करने पर 20 साल में कुल निवेश 12 लाख रुपये होगा। 8.25% ब्याज दर पर यह रकम करीब 30.4 लाख रुपये हो सकती है।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Pawan Jayaswal

•

Updated: 27 Oct 2026, 3:06 PM IST

vpf calculator

पीएफ योगदान के अलावा अतिरिक्त रकम वीपीएफ में डाल सकते हैं। (PC: AI)

VPF Interest Rate: नौकरीपेशा लोग रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो उन्हें छोटी-छोटी बचत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF में पैसा जमा करने वाले कर्मचारी चाहें तो इसमें अपनी तरफ से अतिरिक्त रकम भी जोड़ सकते हैं। इसके लिए वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का विकल्प मिलता है। मान लीजिए कोई कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी से 5,000 रुपये एक्स्ट्रा वीपीएफ में जमा कराए और यह सिलसिला 20 साल तक जारी रखे, तो 8.25% सालाना ब्याज के हिसाब से यह रकम बढ़कर करीब 30.4 लाख रुपये हो सकती है। इसमें कर्मचारी द्वारा अपनी तरफ से जमा की गई कुल रकम 12 लाख रुपये होगी, जबकि 18.4 लाख रुपये की रकम ब्याज और चक्रवृद्धि इफेक्ट के चलते जुड़ सकती है। हालांकि, यह एक अनुमान है। ईपीएफ की ब्याज दर हर वित्त वर्ष के लिए तय होती है, जिसके हिसाब से वास्तविक रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

EPF और VPF में क्या अंतर है?

EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट की बचत का एक प्रमुख माध्यम है। इसमें कर्मचारी की सैलरी से तय रकम हर महीने कटती है और नियोक्ता यानी कंपनी भी इसमें योगदान करती है। कर्मचारी और कंपनी का योगदान नियमों के अनुसार तय होता है। वहीं, VPF यानी वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड उन कर्मचारियों के लिए है, जो सामान्य EPF योगदान से ज्यादा रकम अपने भविष्य के लिए जमा करना चाहते हैं। इसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त योगदान कर सकता है। यह पैसा अलग योजना में नहीं, बल्कि उसी प्रोविडेंट फंड खाते में जमा होता है और उस पर लागू ईपीएफ ब्याज दर के हिसाब से ब्याज मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी EPF में हर महीने अपनी नियमित हिस्सेदारी जमा करने के अलावा 5,000 रुपये अतिरिक्त देना चाहता है, तो वह वीपीएफ का विकल्प चुन सकता है। इससे उसकी रिटायरमेंट के लिए बचत बढ़ सकती है।

हर महीने 5,000 रुपये जमा करने पर कितना पैसा बनेगा?

VPF में अतिरिक्त योगदान का फायदा समझने के लिए 20 साल का उदाहरण लेते हैं। मान लेते हैं कि कोई कर्मचारी हर महीने 5,000 रुपये जमा करता है और पूरे निवेश काल में 8.25% सालाना ब्याज मिलता है।

  • हर महीने जमा: 5,000 रुपये
  • एक साल में जमा: 60,000 रुपये
  • 20 साल में कुल जमा: 12,00,000 रुपये
  • अनुमानित ब्याज और चक्रवृद्धि का फायदा: करीब 18,40,000 रुपये
  • अनुमानित कुल फंड: करीब 30,40,000 रुपये

यानी कर्मचारी अपनी सैलरी से 12 लाख रुपये अतिरिक्त जमा करता है, लेकिन लंबे समय तक ब्याज मिलने के कारण कुल रकम करीब 30 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है।

चक्रवृद्धि ब्याज से कैसे बढ़ता है पैसा?

वीपीएफ में लंबी अवधि तक बचत करने का एक बड़ा फायदा चक्रवृद्धि ब्याज है। इसमें जमा रकम पर ब्याज मिलता है और खाते में जमा ब्याज भी आगे ब्याज कमाने में योगदान देता है। समय बीतने के साथ इसका असर बढ़ता जाता है। शुरुआती कुछ साल में निवेशक को बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं लग सकती। लेकिन जब रकम कई साल तक खाते में बनी रहती है, तो ब्याज से मिलने वाला फायदा भी बढ़ता है।

VPF में पैसा जमा करने के क्या फायदे हैं?

रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत

अगर कर्मचारी केवल अनिवार्य ईपीएफ योगदान पर निर्भर रहता है, तो रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड उसकी सैलरी, योगदान और निवेश अवधि पर निर्भर करेगा। वीपीएफ से अतिरिक्त बचत करने पर रिटायरमेंट फंड बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सैलरी से सीधे कटता है पैसा

वीपीएफ का योगदान आमतौर पर सैलरी से काटकर जमा किया जाता है। इससे हर महीने अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं रहती। बचत में नियमितता बनी रहती है और पैसे को दूसरे खर्चों में इस्तेमाल करने की संभावना कम हो सकती है।

लंबे समय तक बचत करने का फायदा

वीपीएफ उन कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके रिटायरमेंट में अभी 15 से 20 साल या उससे ज्यादा समय बचा है। लंबी अवधि में जमा रकम पर ब्याज जुड़ता रहता है।

EPF खाते में ही अतिरिक्त योगदान

वीपीएफ के लिए अलग निवेश खाता खोलने की जरूरत नहीं होती। अतिरिक्त रकम उसी प्रोविडेंट फंड खाते में जमा होती है। इससे बचत को एक ही जगह देखना आसान रहता है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।