
Madras High Court dismisses petition
चेन्नई।मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को शिक्षकों के एक वर्ग के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका को खारिज कर दिया। शिक्षकों का यह तबका महानगर में अपनी मांगों को लेकर बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने वाला है।
मुख्य न्यायाधीश ममता बनर्जी और जस्टिस अब्दुल कुद्दोस की सदस्यता वाली न्यायिक पीठ ने एस. सिरगेथ नैना मोहम्मद की तत्संबंधी याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल होना चाहिए। उनको अपनी जवाबदेही पता होनी चाहिए और उनका आचरण उसी अनुरूप होना चाहिए।
प्रथम पीठ ने कहा कि वह इस बात में किसी तरह की दखल नहीं दे सकता कि विरोध प्रदर्शन उनके परिसर में होगा अथवा किसी निजी जगह पर। न्यायालय ने यह भी कहा कि ज्वाइंट एक्शन काउंसिल ऑफ टीचर्स आर्गनाईजेशन्स एंड गवर्नमेंट एम्प्लॉइज आर्गनाइजेशन्स (जेक्टो-जिओ) जनता को असुविधा में डालने जैसा कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेगा।
फरियादी ने २१ फरवरी को जेक्टो जिओ के चेन्नई में हुए विरोध प्रदर्शन का हवाला दिया कि किस तरह से उनके कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ था। याची ने आरोप लगाया कि उनके प्रदर्शन की वजह से आमजनता को बड़ी असुविधा हुई। ऐसे में जेक्टो जिओ के विरोध प्रदर्शन को रोका जाना चाहिए क्योंकि उनको पुलिस आयुक्त की अनुमति भी हासिल नहीं है।
ज्ञातव्य है कि जेक्टो जिओ ने वेतन वृद्धि, पुरानी पेंशन योजना समेत विविध मांगों को लेकर गत सितम्बर महीने में बेमियादी हड़ताल भी शुरू की थी जिसे बाद में सरकारी आश्वासन पर रोक दिया गया था।
२९०२ अंदरूनी सडक़ों की जल्द होगी मरम्मत
महानगर में लगभग २५०९ सडक़ें ऐसी हैं जो मेट्रो पाइपलाइन, इलेक्ट्रिक केबल बिछाने और ड्रेनेज के निर्माण के कारण उखड़ गई हैं। इनको दुरुस्त करने के लिए ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने २३० करोड़ रुपए की राशि स्वीकृ त की है। इन सभी सडक़ों के निर्माण और मरम्मत का कार्य तमिलनाडु अरबन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड अर्थात (टीयूआरआईएफ) द्वारा किया जाएगा। टीयूआरआईएफ सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार महानगर में २९०२ अंदरूनी सडक़ों की मरम्मत और नवनिर्माण का कार्य जल्दी ही शुरू कर दिया जाएगा।
निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर की २५७४ अंदरुनी सडक़ों के अलावा १५ बस रूटों वाली सडक़ों की मरम्मत और निर्माण की अनुमति दी जा चुकी है। इन सभी सडक़ों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए २०७ करोड़ की धनराशि खर्च करने की स्वीकृति दी गई है। कॉर्पोरेशन अधिकारी एस. सेल्वराजन ने बताया कि शहर के फुटपाथों की मरम्मत के लिए अलग से २३ करोड़ की धनराशि का आवंटन किया गया है। इन सभी फुटपाथों को तय मानकों के हिसाब से चौड़ा किया जाएगा ताकि पैदल राहगीरों को सडक़ पर चलने की जरूरत न पड़े। अधिकारियों के अनुसार इन सभी निर्माण और मरम्मत कार्यों की देखरेख और निरीक्षण के लिए कॉर्पोरेशन ने ४ करोड़ रुपए की अलग से आवंटित किया है।
बतादें कि २०१५ में आई भारी बारिश की बाढ़ के बाद पहली बार एक साथ हजारों की तादाद में सडक़ों के पुननिर्माण और मरम्मत का काम शुरू किया जा रहा है।
सडक़ों के जर्जर होने का मुख्य कारण
महानगर में अधिकांश सडक़ों के जर्जर हालत की मुख्य वजह सडक़ों पर मेट्रो वाटर, पाइपलाइन, ड्रेनेज का निर्माण, जमीन के नीचे बिजली की केबल डालने के लिए खुदाई करना है। महानगर के कई प्रमुख बस रूटों समेत हजारों अंदरूनी सडक़ें टूट गई हैं जिनका निर्माण बेहद जरूरी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि महानगर में कई सडक़ ऐसी हैं जो पिछले सात साल से भी अधिक समय से जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं, इन सडक़ों पर वाहनों का संचालन बमुश्किल हो पाता है, इसलिए इन सडक़ों का अत्यावश्यक है।
अधिकारी ने बताया कि उत्तरी चेन्नई मसलन सूरापेट, माधवरम, मनली सरीखे इलाकों की सडक़ों की देखभाल की जिम्मेदारी बीआरआर को दी गई है।
उल्लेखनीय है कि इन सडक़ों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए सरकारी ठेके के लिए टेंडर अक्टूबर २०१७ में आमंत्रित किया गया था, इस टेंडर बीड को २७ दिसम्बर को खोला गया। पिछली जनवरी में वर्क आर्डर जारी किया गया था।
ग्रेटर चेन्नई का कहना था कि जो टेंडर बीड में प्रोजेक्ट की राशि कोट की गई है वह स्वीकृत राशि से १० से १२ प्रतिशत अधिक है। अधिकारी ने बताया कि यह टेंडर बीड आज के बाजार में उपलब्ध निर्माण सामग्री की ताजा दरोंं पर आधारित है।
वैसे इस टेंडर बीड में शामिल कम्पनियों से कॉर्पोरेशान ने अनुरोध किया है कि वे इन टेंडर दरों पर फिर से विचार करें तथा कम से कम ३ से ४ प्रतिशत दरें कम करें।
Published on:
23 Mar 2018 11:14 pm
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