
ब्रेन हेमरेज के बाद बिस्तर पर थी मां, योगाचार्य ने क्या किया, पढ़ें पूरी खबर
छिंदवाड़ा. वर्ष 2012 की बात है। मेरी मां सावित्री माहोरे को हाई बीपी था। ब्रेन हेमरेज हो चुका था। छिंदवाड़ा में कई डॉक्टरों से सम्पर्क किया। शुरुआती इलाज के बाद उन्हें नागपुर रैफर कर दिया गया। वहां अस्पताल में मां एक हफ्ते बेड पर थीं। डॉक्टर ने काफी प्रयास किया, लेकिन अंतत: परिणाम यह निकला कि वह बेड पर ही रहेंगी। फिर थक हार कर मां को छिंदवाड़ा ले आए। फिर मैंने सोचा एक प्रयास योग के माध्यम से मां को ठीक करने में किया जाए। मैंने योगा प्रेशर प्वाइंट से मां का इलाज करना शुरू किया। कुछ ही दिनों में अप्रत्याशित परिणाम दिखने लगे। मां ठीक होने लगी थी। कुछ दिनों बाद वह प्राणायाम करने लगी। इसके पश्चात योगा का सूक्ष्य अभ्यास। एक दिन ऐसा आया जब मां खुद बिस्तर से उठकर टहलने लगी। यह सब सम्भव हुआ योगा से। आज मां न केवल सूर्य नमस्कार जैसे योगाभ्यास करती हैं बल्कि वह घर के हर काम में भी हाथ बंटाती हैं। योगा ने मेरी मां को नया जीवन दिया है। यह कहना 35 वर्षीय योगाचार्य हेमंत माहोरे का। जिन्होंने न केवल अपनी मां को योग से नया जीवन दिया बल्कि उनकी अब तक की जिंदगी में कई ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने योगा से अपनी बड़ी बीमारी ठीक की। विश्व योगा डे पर हेमंत ने अपने अब तक के अनुभव को शेयर किया।
बचपन में पानी में किया करते थे योग
योगाचार्य हेमंत वर्ष 2009 से छिंदवाड़ा में योग की सेवा दे रहे हैं। उनके साथ पत्नी पूनम माहोरे भी योग सिखाती हैं। योगाचार्य ने अब तक काफी लोगों को निशुल्क शिविर लगाकर योग सिखाया। कइयों की बीमारी योग से ठीक की। हेमंत कहते हैं कि मेरे जीवन का उद्देश्य ही है कि योग से लोगों की सेवा करूं। हालांकि अब यह मेरे जीविका का साधन भी बन चुका है। मैं समय-समय पर निशुल्क शिविर लगाता हूं। जिससे लोग योगा को अपने जीवन में उतारें। हेमंत बताते हैं कि बचपन में मैं किताबों में योग को पढ़ा करता था। जब गर्मी की छुट्टियां होती तो दोस्तों के साथ नदी में योगा करता। किताबों को पढक़र यह समझ में आया कि हम जिसे खेल-खेल में करते हैं सही में वह योगा है। 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद मैंने हरिद्वार में योग अल्टरनेटिव थेरेपी का कोर्स किया। इसके बाद मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में योगा शिविर लगाए। वर्ष 2009 में मैं यह सोचकर छिंदवाड़ा आ गया कि अपनी जन्मभूमि पर ही लोगों को योग सिखाकर उनकी सेवा करूं।
अपने लिए कठोर और दूसरों के लिए बन जाएं नर्म
योगाचार्य हेमंत माहोरे कहते हैं कि व्यक्ति को खुद के लिए आध्यात्मिक जीवन जीना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब आप अपने लिए कठोर हो जाएं और दूसरों के लिए नर्म हो जाएं। आज योग को लोग अलग-अलग दृष्टि से देख रहे हैं। जबकि मनुष्य योनी के लिए ही योग पद्धति बनी हुई है। योगाचार्य ने कहा कि अगर आप कुछ पल प्रकृति से जुडक़र योग करें तो हमेशा निरोगी रहेंगे। इसके लिए आपको प्रतिदिन अपने लिए आधे घंटे का समय निकालना है।
Published on:
21 Jun 2018, 12:07 PM IST
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