
Milkha Singh
Milkh Singh: 20 नवंबर 1929 को पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह ने कभी सोचा भी नहीं था कि भारतीय इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, अभी पिछले साल है मिल्खा सिंह का देहांत 18 जून 2021 को हुआ था। बता दें कि मिल्खा सिंह ने आज ही के दिन 64 साल पहले भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक जीता था। मिल्खा सिंह जिन्हें फ्लाइंग सिख के नाम से भी जाना जाता है उन्होंने भारत के लिए पहली बार 1958 कार्डिफ राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए दौड़ में पहला स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने उस समय के महान धावक मैल्कम स्पेंस को हराते हुए यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
बनाया था विश्व रिकॉर्ड
जब 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में 440 गज की दौड़ की प्रतियोगिता चल रही थी तो उस समय इस रेस में 6 अन्य खिलाड़ी भी थे लेकिन उस साल मिल्खा को एक अंडररेटेड खिलाड़ी समझा जा रहा था। लेकिन जब दौड़ खत्म हुई तो मिल्खा सिंह ने अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिखवा दिया था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया वेल्स के खचाखच भरे स्टेडियम में महान धावक मैलकम स्पेंस को पीछे छोड़ चैंपियन बने थे। उन्होंने यह दौड़ रिकॉर्ड 46.6 सेकेंड में पूरी की थी साथ ही एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था।
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भारत को दूसरे पदक के लिए करना पड़ा 52 साल इंतजार
धावक मिल्खा सिंह के एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारत को एक लंबा अरसा हो गया जब उसने एथलेटिक्स में कोई स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय टीम का यह सूखा साल 2010 में खत्म हुआ जब डिस्कस थ्रो में कृष्णा पूनिया ने भारत को पदक दिलाया था। यह पदक एथलेटिक्स में भारत को लगभग 52 साल बाद मिला था।
इसके बाद नीरज चोपड़ा ने साल 2018 में एथलेटिक्स जेवलिन थ्रो में पदक हासिल किया था। बता दें कि जब मिलकर मिल्खा सिंह ने अपनी दौड़ खत्म की थी तो उस समय ऑस्ट्रेलिया के उस स्टेडियम में कम ऑन सिंह, कम ऑन सिंह के नारे गूंज रहे थे और दर्शक दीर्घा में बैठे किसी को भी यह विश्वास नहीं हुआ कि भारत के इस धावक ने विश्व चैंपियन को हरा दिया है।
Updated on:
24 Jul 2022, 5:31 PM IST
Published on:
24 Jul 2022, 5:30 PM IST
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