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टीम इंडिया से बाहर हो जाने के बाद गहरे अवसाद में चले गए थे प्रवीण कुमार, दे देना चाहते थे जान

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने बड़ा खुलासा किया कि एक समय वह इतने गहरे अवसाद में आ गए थे कि अपनी जान दे देना चाहते थे।
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नई दिल्ली

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Mazkoor Alam

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Updated: 19 Jan 2020, 6:24 PM IST

Praveen Kumar

Praveen Kumar

मेरठ : हाल के दिनों में ग्लेन मैक्सवेल समेत ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ियों ने मानसिक अवसाद के कारण क्रिकेट से ब्रेक लिया था। इनमें से मैक्सवेल वापसी कर चुके हैं और बिगबैश लिग में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा कप्तान विराट कोहली ने मैक्सवेल की तारीफ करते हुए कहा था कि वह भी एक समय इस दौर से गुजरे हैं। अब टीम इंडिया के एक और पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार ने इसका खुलासा किया है। अब क्रिकेट से संन्यास ले चुके तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने ताजा खुलासा में कहा है कि उनके जीवन में एक समय ऐसा आया था कि वह जान दे देना चाहते थे।

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रिवॉल्वर लेकर निकल गए थे घर से

एक मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक सुबह वह रिवॉल्वर लेकर घर से निकले और कार को हरिद्वार हाईवे की ओर ले गए। टीम इंडिया से बाहर होने बाद वापसी न कर पाने के कारण वह अवसाद में चले गए थे। लेकिन अपने परिवार और बच्चों के ख्याल ने रोक लिया। उन्हें लगा कि वह अपने बच्चों के साथ ये नहीं कर सकते। उन्हें इस दर्द से गुजरने के लिए वह मजबूर नहीं कर सकते।

संन्यास के बाद गहरे अवसाद में चले गए थे

2014 में टीम इंडिया और फिर आईपीएल में भी किसी टीम के न खरीदने के बाद डिप्रेशन उन पर असर करने लगा था, लेकिन संन्यास के बाद तो स्थिति और खराब हो गई। वह मेरठ स्थित घर में घंटों बैठकर अपनी गेंदबाजी के वीडियोज देखते रहते थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनके साथ साथ क्या हो रहा है। उनके दिमाग में साथ-साथ यह भी ख्याल चलता रहता था कि भारत में किसी को डिप्रेशन नहीं होता है। प्रवीण कुमार ने 2018 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया था। अब वह नियमित तौर डिप्रेशन की दवा ले रहे हैं और इलाज करवा रहे हैं।

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कोई काम नहीं होने से समस्या हुई गंभीर

भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐसा नजरिया है कि कोई इस बारे में किसी से बात नहीं करता। इसी कारण प्रवीण कुमार भी किसी को बताने में झिझक रहे थे। क्रिकेट से पूरी तरह दूर होने के बाद उनकी समस्या बढ़ती गई। वहीं कई पूर्व खिलाड़ी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कमेंटेटर, कोच या मेंटोर को रूप में खेल से जुड़े गए। लेकिन प्रवीण के पास कोई काम नहीं था। उन्होंने कहा कि वह कुछ करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पा रहे थे।