भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐसा नजरिया है कि कोई इस बारे में किसी से बात नहीं करता। इसी कारण प्रवीण कुमार भी किसी को बताने में झिझक रहे थे। क्रिकेट से पूरी तरह दूर होने के बाद उनकी समस्या बढ़ती गई। वहीं कई पूर्व खिलाड़ी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कमेंटेटर, कोच या मेंटोर को रूप में खेल से जुड़े गए। लेकिन प्रवीण के पास कोई काम नहीं था। उन्होंने कहा कि वह कुछ करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पा रहे थे।