
कोलकाता। मैदान पर वीरेंद्र सहवाग को सुनील गावस्कर के बाद टेस्ट में भारत का सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज बताने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने उनकी मैदान से बाहर की जिंदगी के लिए कुछ ऐसा कमेंट किया, जिसे जानकर आप भी हंसते रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली का यह तूफानी बल्लेबाज मैदान के बाहर अपने अस्तित्व से अनजान था। वह बस सोता रहता था और आपको टेस्ट मैच से पहले भी उन्हें बार-बार जबरदस्ती करते हुए जगाना पड़ता था। यहां गांगुली ने एक कार्यक्रम में शुक्रवार को ये खुलासा किया। पूर्व कप्तान ने कहा, मेरी टीम में सहवाग था, जो मेरी नजरों में सुनील गावस्कर के बाद भारत के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट सलामी बल्लेबाज हैं, लेकिन मैदान के बाहर एक इंसान के तौर पर वह जानते ही नहीं थे कि उनका भी कोई अस्तित्व है। वह सोते रहते थे और आपको टेस्ट मैच से पहले उन्हें बार-बार जबरदस्ती करते हुए जगाना पड़ता था।
अपना भी खोला एक राज
गांगुली ने अपना भी एक राज खोला और कहा, मैं बड़े आराम से काम करने वाला शख्स हूं, लेकिन जब मैं 2000 में कप्तान बना, तब मुझे लगा की इस टीम को चीजें दूसरी तरह से करनी होगी। भारतीय होने के नाते हम आराम पसंद इंसान हैं। गांगुली जब भारतीय टीम के कप्तान बने थे, तब भारत मैच फिक्सिंग विवाद से जूझ रहा था। गांगुली की कप्तानी की सबसे अच्छी बात यह रही कि उन्होंने एक ऐसी टीम तैयार की जो एक टीम के तौर पर काफी मजबूत थी। उनकी कप्तानी में भारत ने विदेशों में पहले से ज्यादा मैच और सीरीज जीतीं। गांगुली ने 49 टेस्ट मैचों में टीम की कप्तानी की, जिनमें से 21 में जीत 13 में हार मिली। वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान भी थे। उनके इस रिकॉर्ड को बाद में महेंद्र सिंह धौनी ने तोड़ा। गांगुली की कप्तानी में ही भारत ने 2003 में आईसीसी विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गई थी।
चयन प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा पारदर्शी
गांगुली ने कहा, जब भारत 2001 में ऑस्ट्रेलिया में खेल रहा था, तब मैंने देखा की यह अलग टीम है और लडऩे के लिए तैयार है। इसलिए एक कप्तान के तौर पर मुझे मैदान पर वो माहौल बनाना था, जिसकी शुरुआत मुझसे होनी थी। गांगुली ने कहा कि टीम चयन पहले की अपेक्षा अब ज्यादा पारदर्शी हो गया है। उन्होंने कहा, चयन प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा पारदर्शी हो गई है। आप जब इस भारतीय टीम को देखते हैं और विराट कोहली जैसे ईमानदार तथा जुनूनी कप्तान को देखते हैं तो आप को पता चलता है कि यह कितना पारदर्शी है। गांगुली ने कहा, वह खिलाडिय़ों को ध्यान से देखते हैं। हर कोई गलती करता है जो मान्य भी होती है। आप परिणाम देख सकते हैं कि भारत किस तरह से आगे बढ़ रहा है। मैंने जब 1996 में क्रिकेट शुरू की थी, तब क्रिकेट अलग थी। यह खेल दिन ब दिन बेहतर होता जा रहा है।
Published on:
25 Nov 2017, 5:51 PM IST
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