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बुराड़ी मौत कांड: 250 लोगों से पूछताछ, फिर भी खाली हैं पुलिस के हाथ

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम बुराड़ी कांड के खुलासे में उलझती नजर आ रही है। इस मामले में पुलिस की जांच पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच और मामले में दायर प्राथमिकी में लोगों की हत्या की आशंका जाहिर की गई थी लेकिन अब यह निष्कर्ष बदल गया है।
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 10 Jul 2018, 9:15 AM IST

burari case

बुराड़ी मौत कांड: 250 लोगों से पूछताछ, फिर भी खाली हैं पुलिस के हाथ

नई दिल्ली। बुराड़ी के एक ही परिवार के 11 लोगों के फांसी लगा कर मरने के मामले में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में जांच कर्ताओं कहना है कि यह मनोविकार से पीड़ित लोगों की सामूहिक आत्महत्या का मामला है। बुराड़ी में मृत परिवार के घर से मिले रजिस्टर से इस मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

पुलिस का अब कहना है कि फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मनोवैज्ञानिक आटोप्सी कराएगी और पता लगाने की कोशिश करेगी कि उन्होंने यह कदम क्यों और किन परिस्थितियों में उठाया। बता दें कि बुराड़ी में एक ही परिवार के सभी 11 सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। फिलहाल अभी तक पुलिस यह मानकर चल रही है कि इस घटना में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं था।

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सबूत जुटाने में जुटी पुलिस

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के सिलसिले में पुलिस अब तक तकरीबन 250 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि अभी तक पुलिस यही मानकर चल रही है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है लेकिन उसकी जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित है। पुलिस ने बताया कि उन्हें आखिरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। उसके बाद पुलिस सभी मतृकों की मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी जांच कराएगी।

जारी है पूछताछ का दौर

मृतकों में से एक प्रियंका के मंगेतर से पुलिस ने दोबारा बंकरीब तीन घंटे की पूछताछ की। पुलिस ने कहा कि उसने परिवार के किसी भी रीति-रिवाज में शामिल होने की जानकारी होने से इनकार किया। इसके अलावा इस बारे में और अधिक जानकरी जुटाने के लिए पुलिस की टीम फिर से राजस्थान जाएगी।

पुलिस ने बताया आत्महत्या का मामला

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम बुराड़ी कांड के खुलासे में उलझती नजर आ रही है। इस मामले में पुलिस की जांच पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच और मामले में दायर प्राथमिकी में लोगों की हत्या की आशंका जाहिर की गई थी लेकिन अब यह निष्कर्ष बदल गया है। पहले दर्ज एफआईआर में जहां माना जा रहा था कि बाहर के किसी व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम दिया है लेकिन अब यह कहा जा रहा है कि यह मनोविकार से पीड़ित लोगों की सामूहिक आत्महत्या का मामला है। पुलिस के वरिष्ठ अधियकरी ने बताया कि जब स्थानीय पुलिस अधिकारी वहां जांच के लिए पहुंचे और रोहिणी से आई फोरेंसिक टीम ने मौके का मुआयना किया तो उन्हें हत्या का अंदेशा हुआ। लेकिन बाद में सबूतों की निशानदेही और पूछताछ के बाद आत्महत्या की बात सामने आने लगी।

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दिल्ली पुलिस पर सवाल

दिल्ली पुलिस पर आरोप लग रहा है कि उसने अपनी जांच में जान बूझकर आत्महत्या का एंगल डाला और हत्या के अंदेशे को सिरे से खरिज कर दिया। पुलिस पर आरोप लगाया जा रह है कि जब शुरुआती एफआईआर में हत्या का अंदेशा जताया गया था तो जांच उस दिशा में क्यों नहीं बढ़ी? लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या दिल्ली पुलिस ने आत्महत्या की थ्योरी प्लांट करवाई? दरअसल अंधविश्वास के चलते सामूहिक आत्महत्या की थ्योरी पर जिस तरह दिल्ली पुलिस ने जोर दिया है उससे उसके दावे पर संदेह उठना लाजिमी है।