
केरल हाईकोर्ट में दुष्कर्म पीड़िता ने खुद जिरह कर जीता केस, षड़यंत्रकारियों को भी सिखाया सबक
कोच्चि। केरल हाई कोर्ट में एक दुष्कर्म पीड़िता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। यहां दुष्कर्म केस में पीड़िता ने खुद जिरह कर केस जीतने की मिसाल कायम की है। दरअसल, महिला के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी ने पीड़िता को एक झूठे केस में फंसा दिया था। आरोपी ने यह षड़यंत्र इसलिए रचा था ताकि पीड़िता दुष्कर्म मामले में कोर्ट न पहुंच सके और पैरवी भी न कर पाए।
जानकारी के अनुसार कलामस्सेरी पुलिस स्टेशन में 30 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। यह शिकायत राजेश बाबू नाम के शख्स द्वारा दर्ज कराई गई थी। राजेश का आरोप था कि पीड़िता ने कार पार्किंग को लेकर उसके साथ अभद्रता और मारपीट की थी। वहीं, दुष्कर्म पीड़िता की ओर से भी राजेश और अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। यहां दुष्कर्म पीड़िता ने उन पर रास्ता रोकने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। वहीं पीड़िता का कहना था कि दुष्कर्म मामले में उसे पैरवी करने से रोकने लिए उसके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है।
पीड़िता का आरोप था कि राजेश व उसके साथी दुष्कर्म मामले के आरोपी के इशारे पर काम कर रहे थे। इन लोगों की मंशा दुष्कर्म मामले में उसे कोर्ट पहुंचने से रोकना था। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस के अब्राहम मैथ्यू की कोर्ट ने पाया कि राजेश के बयान और उसकी डॉक्टरी रिपोर्ट आपस में मैच नहीं कर रहे थे। जिसको आधार मानते हुए कोर्ट ने पीड़िता के खिलाफ दर्ज कराए मुकदमे को खारिज कर दिया। वहीं, दुष्कर्म मामले में खुद जिरह कर रही पीड़िता ने बताया कि..क्योंकि उसने घटना के साथ हैवानियत को सहा है, इसलिए उसके अलावा कोई अन्य व्यक्ति उसके साक्ष्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर सकता। पीड़िता ने कोर्ट को उसकी दलीले और साक्ष्यों के विश्लेषण के लिए कोर्ट को शुक्रिया अदा किया।
Updated on:
18 Jul 2018 01:10 pm
Published on:
18 Jul 2018 01:06 pm
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