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Koria Land Fraud: हेराफेरी कर हड़प ली फौजी की 2.02 हेक्टेयर जमीन, ब्रिगेडियर बेटे की शिकायत पर कमिश्नर कोर्ट में मुकदमा दर्ज

Land Fraud: भारतीय वायु सेना में तैनात रिटायर्ड फौजी को सरकार की ओर से आवंटित की गई थी 2.02 हेक्टेयर जमीन, जमीन हड़पने वाले 11 लोगों को जारी किया गया नोटिस, 28 सितंबर को होगी सुनवाई
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Land Fraud case of Ex Army

Koria Land fraud, सरगुजा संभागायुक्त कार्यालय (Photo- Patrika)

बचरापोड़ी. भूतपूर्व फौजी के नाम पर सरकार से आवंटित जमीन का फर्जीवाड़ा (Land Fraud in Koria) किया गया है। इसके तहत नए खसरा नंबर को अलग-अलग 15 टुकड़े बांटकर रजिस्ट्री करा 2.02 हेक्टेयर जमीन हड़प ली गई हैं। इसकी शिकायत दिवंगत फौजी के ब्रिगेडियर पुत्र ने कलेक्अर से की थी। कलेक्टर ने मामले की जांच कराई तो जमीन हड़पने का मामला सही पाया गया। इस मामले में सरगुजा संभागायुक्त कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में 11 लोगों को नोटिस जारी कर 28 सितंबर से पहले जवाब मांगा गया है।

भारतीय वायु सेना के रक्षाकर्मी स्व. वशिष्ठ सिंह को कोरिया की ग्राम पंचायत बचरा में खसरा नंबर 552, 553 रकबा 0.07, 1.95 हेक्टेयर (कुल 2.02 हेक्टेयर) जमीन आवंटित थी। उनका 1994 और उनकी पत्नी चंदा देवी का 2007 में निधन हो गया था। वर्तमान में उनके पुत्र ब्रिगेडियर जितेंद्र सिंह, परविंदर सिंह व पुत्री डॉ. राखी हैं, जो ग्राम पंचायत बचरा में निवास नहीं करते हैं। इसलिए मामले का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर जमीनें बेच डालीं।

सबसे पहले एक महिला ने धोखाधड़ी कर ख़ुद को चंदा देवी बताकर फर्जी बिक्री कर दी। प्रकरण में फर्जी तस्वीर, राशनकार्ड, हस्ताक्षर कर सूरजपुर निवासी सविता कुंडु पति शम्भू कुंडु के नाम पर विक्रयनामा एवं नामांतरण कराया गया। उसके बाद सविता कुंडु ने पूरी जमीन बेच डाली है। सैन्यकर्मी के नाम पर सरकार से आवंटित जमीन की हेराफेरी (Land Fraud case) करने के मामले में उनके पुत्र ब्रिगेडियर जितेंद्र ने कलेक्टर को शिकायत पत्र भेजा था।

कलेक्टर ने तहसीलदार की जांच के आधार पर पुलिस अधीक्षक को दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने आदेश दिए थे। सैन्य कर्मी को आवंटित जमीन का फर्जीवाड़ा कर रकबा बदल दिया गया था। फिर अलग-अलग 15 टुकड़ों में नया खसरा 552/1 और 553/1 से 553/13 तक टुकड़ों में बांटकर रजिस्ट्री कराई गई थी।

मामले में न्यायालय अपर आयुक्त सरगुजा अम्बिकापुर (Surguja Commissioner) ने 11 पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। साथ ही तहसीलदार पोड़ी बचरा को निर्देश दिए गए हैं कि 11 नोटिस को नियत पेशी 28 सितंबर से पहले अनिवार्य रूप से तामिली कराकर भिजवाना सुनिश्चित करें। प्रकरण की 28 सितंबर को सुबह 11 बजे से न्यायालय आयुक्त संभाग सरगुजा में सुनवाई होगी।

Land Fraud of EX Army man: किसे, कितनी बेची थीं जमीनें

अशोक कुमार जायसवाल पिता सत्यनारायण जायसवाल ग्राम सकरिया निवासी को 0.04 व 0.07 हेक्टेयर, कार्तिक कुमार श्रीवास्तव पिता जगदीश प्रसाद न्यू कोरिया माइंस गोदरीपारा चिरमिरी को 0.03 व 0.08 हेक्टेयर, चंद्रभूषण चक्रधारी पिता सहदेव चक्रधारी ग्राम बचरा को 0.24 हेक्टेयर, अशोक कुमार पिता रामकुमार ग्राम बचरा को 0.20 हे., मिथलेश कुमार पिता झुन्नु जायसवाल ग्राम पोड़ी को 0.36 हेक्टेयर जमीन बेची गई थी।

वहीं हरिशंकर पिता मंदीप साहू ग्राम सकरिया को 0.10 हेक्टेयर, संजय कुमार पिता ललनराम ग्राम सकरिया को 0.10 हेक्टेयर, प्रवीण कुमार जसवंत पिता ईश्वर प्रसाद साहू ग्राम सकरिया को 0.10 हेक्टेयर, मथल प्रसाद पिता बिरंची साहू ग्राम तोलगा को 0.10 हे. बेची गई थी। जबकि विश्वनाथ यादव पिता सीताराम यादव ग्राम बचरा को 0.10 हेक्टेयर, राम प्रकाश साहू पिता शिवधारी साहू ग्राम सकरिया को 0.06 हेक्टेयर, मनोज कुमार साहू पिता ईश्वरीय प्रसाद साहू ग्राम सकरिया को 0.02 हेक्टेयर और ओम प्रकाश साहू पिता विश्वनाथ साहू ग्राम भंडारपारा कोटा खडग़वां को 0.02 हेक्टेयर जमीन बेची गई थी।

यह है जमीन हड़पने के आरोप से जुड़ा मामला

भूतपूर्व सैन्यकर्मी स्व. वशिष्ठ सिंह के पुत्र ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह केंद्रीय संगठन ईसीएचएस एडजुटेंट जनरल शाखा रक्षा मंत्रालय दिल्ली कैंट के उप प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि फर्जीवाड़ा (Land forgery) करने वाले पुरुष व महिला ने दिवंगत सैनिक वशिष्ठ सिंह व पत्नी स्व चंदा देवी बनकर खुद को पेश किया। फिर सविता कुण्डू निवासी सरगुजा को 27 अप्रैल 2011 को बेची थी।

वहीं स्व चंदादेवी बनकर पेश होने वाली विमला सिंह ने 29 मार्च 2007 में अपने स्वामित्व एवं आधिपत्य की भूमि को चिरमिरी निवासी फुलेश्वरी को बिक्री कर दी थी। एक ही जमीन दो के नाम पर, लेकिन एक ने बिक्री कर दी। एक रजिस्ट्री में चश्मा पहनी फोटो तो दूसरी में बिना चश्मे की फोटो लगी है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने भी शिकायत दर्ज कराई थी।