
ग्वालियर में बसों की जांच करते परिवहन विभाग के अधिकारी।
ग्वालियर। शहर और अंचल में बसों में आग लगने की घटनाओं के बाद परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस कुछ दिनों के लिए सक्रिय होती है, लेकिन अभियान थमते ही बसों की जांच और कार्रवाई फिर धीमी पड़ जाती है। गुरुवार को दिल्ली से महोबा जा रही राज कल्पना की बस में आग लगने की घटना ने एक बार फिर लंबी दूरी की बसों में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे कुछ दिन पहले चेतकपुरी रोड पर चलती बस में भी आग लग चुकी है। गनीमत रही कि दोनों घटनाओं में बड़ा जनहानि वाला हादसा टल गया।
इन घटनाओं के बाद आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने बसों की जांच के लिए अभियान शुरू किया था। कुछ दिनों तक सड़क पर बसों की चेकिंग और दस्तावेजों की जांच होती दिखाई दी, लेकिन अभियान थमने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी होने लगी है। खासकर लंबी दूरी की बसों में फिटनेस और सुरक्षा उपकरणों को लेकर नियमित निगरानी की जरूरत सामने आ रही है।
बसों की चेकिंग के दौरान फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, अग्निशमन यंत्र और अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है। कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर बस संचालकों पर चालानी कार्रवाई भी की जाती है। हालांकि, बस संचालकों के खिलाफ लगातार और नियमित कार्रवाई नहीं होने से कुछ समय बाद वही स्थिति दोबारा दिखाई देने लगती है।
लंबी दूरी की बसों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण सुरक्षा मानकों का पालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आग या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल बाहर निकालने के लिए बस में पर्याप्त निकास व्यवस्था होना जरूरी है।
सबसे गंभीर सवाल वीडियो कोच बसों को लेकर सामने आ रहा है। कई बसों में यात्रियों के लिए अलग इमरजेंसी एग्जिट गेट की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में चलती बस में आग लगने की स्थिति में यात्रियों को मुख्य दरवाजे से ही बाहर निकलना पड़ सकता है।
बस में आग लगने पर कुछ ही समय में धुआं और लपटें तेजी से फैल सकती हैं। ऐसी स्थिति में एक ही दरवाजे से यात्रियों के बाहर निकलने की कोशिश में भगदड़ की स्थिति बन सकती है। यदि बस में बच्चे, बुजुर्ग या महिलाएं अधिक संख्या में हों तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए बसों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी है।
बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आने के बाद जांच अभियान शुरू होना और कुछ समय बाद उसके थम जाने से नियमित निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच किसी हादसे के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से किए जाने की जरूरत है। खासकर रात में लंबी दूरी तय करने वाली बसों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यशील स्थिति की जांच महत्वपूर्ण है।
आरटीओ ग्वालियर विक्रमजीत सिंह कंग ने कहा कि बसों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बसों की फिटनेस, अग्निशमन उपकरण, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। वीडियो कोच बसों में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था सहित सभी सुरक्षा मानकों को भी चेक कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित बस संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
27 Sept 2026 07:13 pm
Published on:
27 Sept 2026 07:12 pm
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