
नाइट फ्रैंक इंडिया और सीआइआइ की रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर अब रियल एस्टेट की दौड़ से बाहर जा खड़ा है।
ग्वालियर. जमीन महंगी हो रही है, कॉलोनियां फैल रही हैं और प्रॉपर्टी के दाम भी बढ़ रहे हैं…फिर भी ग्वालियर देश के उन शहरों में जगह नहीं बना पाया, जहां रियल एस्टेट का अगला बड़ा उछाल दिखाई दे रहा है। सवाल इसलिए बड़ा है, क्योंकि कभी देश के प्रमुख शहरों में गिने जाने वाला ग्वालियर आज रियल एस्टेट की नई दौड़ में इंदौर और भोपाल जैसे शहरों से पीछे खड़ा है। नाइट फ्रैंक इंडिया और सीआइआइ की रिपोर्ट ‘इंडियाज नेक्स्ट रियल एस्टेट मार्केट्स-2026’ में देश के 11 शहरों को अगले प्रमुख रियल एस्टेट बाजार के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें मध्यप्रदेश से इंदौर और भोपाल शामिल हैं, लेकिन ग्वालियर का नाम नहीं है। रिपोर्ट का संदेश साफ है-रियल एस्टेट की ताकत केवल जमीन की कीमत से तय नहीं होती। उसके पीछे अर्थव्यवस्था, रोजगार, उद्योग, बुनियादी ढांचा, उपभोग और निवेश की पूरी कहानी होती है।
11 शहरों ने दिखाई रफ्तार
रिपोर्ट में चंडीगढ़ ट्राइसिटी, जयपुर, लखनऊ, इंदौर, भोपाल, नागपुर, कोयंबटूर, कोच्चि, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम और गोवा को अगले रियल एस्टेट बाजारों में रखा गया है। इन शहरों में 2021 से 2026 के बीच आवासीय संपत्तियों की कीमतों में औसतन 63 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई, जबकि देश के शीर्ष आठ महानगरों में यह वृद्धि करीब 42 फीसदी रही। 2016-26 के दौरान इन उभरते शहरों में आवासीय कीमतों की औसत सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि करीब 8 फीसदी रही, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह करीब 4 फीसदी रही। यानी अगली रियल एस्टेट कहानी सिर्फ मुंबई-दिल्ली जैसे महानगरों की नहीं, बल्कि उन शहरों की भी है जहां अर्थव्यवस्था तेजी से आकार ले रही है।
ग्वालियर की जमीन महंगी, पर मांग का आधार कमजोर
ग्वालियर में कई इलाकों में जमीन के दाम तेजी से बढ़े हैं। लेकिन महंगी जमीन अपने आप बड़ा रियल एस्टेट बाजार नहीं बनाती। उसके लिए जरूरी है कि शहर में नए रोजगार आएं, उद्योग बढ़ें, बाहर से आबादी आए, लोगों की क्रयशक्ति बढ़े और आवास के साथ ऑफिस, होटल, दुकान, गोदाम और दूसरी व्यावसायिक संपत्तियों की मांग पैदा हो। यहीं ग्वालियर पिछड़ता नजर आता है। बड़े निजी रोजगार केंद्र, कॉरपोरेट कार्यालय और ऐसी औद्योगिक गतिविधियां अभी पर्याप्त नहीं हैं, जो लगातार नई आबादी और निवेश को शहर की ओर खींच सकें।
सबसे बड़ा अड़ंगा : एफएआर की 50 फीसदी क्रय दर
रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार शहर में एफएआर पर 50 फीसदी की क्रय दर भी बड़ी बाधा बनी हुई है। इसका असर बहुमंजिला निर्माण पर पड़ा है और परियोजनाओं की व्यवहार्यता प्रभावित हुई है। क्रेडाई ग्वालियर के अध्यक्ष सुदर्शन झंवर कहते हैं कि स्वतंत्रता के समय ग्वालियर स्टेट के अंतर्गत आने वाला ग्वालियर देश के प्रथम 20 शहरों में गिना जाता था। आज पहले 50 शहरों में भी शामिल नहीं है। पिछले तीन साल से एफएआर पर 50त्न की क्रय दर के कारण चार मंजिल से अधिक निर्माण की एक भी अनुज्ञा नहीं ली गई है। इससे रियल एस्टेट कारोबार ठप हुआ है।
अब जमीन नहीं, रोजगार की दौड़
ग्वालियर को रियल एस्टेट की अगली कतार में लाने के लिए बड़े उद्योग और निजी रोजगार केंद्र बनाने होंगे। उद्योगों के साथ सप्लाई चेन, गोदाम, परिवहन और सहायक कारोबार विकसित करने होंगे। सडक़, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को निवेश और व्यापार से जोडऩा होगा। इसके साथ अटकी परियोजनाओं, मास्टर प्लान और मंजूरियों पर तेजी जरूरी है। पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य को भी रियल एस्टेट से जोड़ा जा सकता है—होटल, छात्रावास, अस्पताल, खुदरा बाजार और मनोरंजन केंद्र नई मांग पैदा कर सकते हैं
Updated on:
27 Sept 2026 11:24 am
Published on:
27 Sept 2026 11:24 am
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