
बिजली पाना संविधान के तहत मूल अधिकार, विवादित संपत्ति पर काबिज सह-मालिक को कनेक्शन देने से नहीं रोक सकते
ग्वालियर. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बिजली कनेक्शन को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बिजली प्राप्त करना व्यक्ति का मौलिक (मूल) अधिकार और जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विद्युत वितरण कंपनी को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर नया बिजली कनेक्शन प्रदान करे। यह आदेश जस्टिस जीएस अहलूवालिया एवं जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने रोशनी जाधव की रिट अपील को स्वीकार करते हुए पारित किया। युगलपीठ ने ङ्क्षसगल बेंच के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
ललितपुर कॉलोनी रोशनी जाधव ने याचिका दायर कर बताया था, विवादित मकान उनकी मां कमला बाई का है, जिनकी वे कानूनी वारिस हैं। वर्तमान में वे उस मकान के एक हिस्से में काबिज हैं। वहीं, उनके भाई व भाभी मां द्वारा की गई एक वसीयत के आधार पर पूरे मकान पर अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। इस कथित वसीयत को शून्य घोषित कराने के लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा लंबित है। सिविल कोर्ट से रोशनी जाधव के पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा भी जारी हो चुकी है, जिससे उनका मकान के हिस्से पर कब्जा प्रमाणित होता है। इसके बावजूद बिजली विभाग ने उनके हिस्से में बिजली कनेक्शन देने या बहाल करने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ दायर याचिका को ङ्क्षसगल बेंच ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वैध कब्जे का निर्धारण अनुच्छेद 226 के तहत नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा, जब तक भाई-भाभी अदालत में वसीयत की वैधता को कानूनी रूप से सिद्ध नहीं कर देते, तब तक एक सह-मालिक को बिजली आपूर्ति से वंचित रखना अनुचित है। ङ्क्षसगल बेंच का आदेश भी निरस्त कर दिया।
Updated on:
27 Sept 2026 02:04 am
Published on:
27 Sept 2026 02:03 am
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