इस बार ट्रेड यूनियनों ने काम बंद नहीं किया बल्कि प्रबंधन ने ही वर्क जॉब देने से इनकार कर दिया। एनएमडीसी प्रबंधन ने साफ किया था कि एफआरएस सिस्टम के जरिए फेस रीडिंग से हाजिरी लगाई जाएगी, तभी मजदूरों को काम मिलेगा। जब कर्मचारियों ने इसका विरोध किया, तो प्रबंधन ने उन्हें काम ही नहीं दिया और ’’नो वर्क, नो वेज’’ नीति अपनाई। इससे एनएमडीसी को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।