मैं गरीब हूं, कौन सुनेगा: पीड़िता का पिता चिकित्सालय, महिला पुलिस थाने में व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बस एक ही बात कह रहा था मैं गरीब आदमी हूं। मेरी कौन सुनेगा। न्याय नहीं मिला तो जी नहीं पाएंगे। आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि आगे से कोई भी किसी की बच्ची का अपहरण नहीं कर सके। वह तो मजदूरी कर परिवार को गुजर-बसर करता है।