7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरकार से वेतन भुगतान की स्वीकृति, फिर भी धमतरी नगर निगम के कर्मचारियों को दीपावली पर नहीं मिली सैलरी

Dhamtari Municipal Corporation: धमतरी नगर निगम के करीब 450 नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन नहीं मिला। दीपावली से पहले सैलरी अटकने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

धमतरी

•

image

Laxmi Vishwakarma

•

Updated: 7 Nov 2026, 2:21 PM IST

Employee Salary Delay

धमतरी नगर निगम में वेतन अटका (Photo Source- AI Generate)

Employee Salary Delay: दीपावली का त्योहार नजदीक है और लोग अपने घरों में त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं। कोई खरीदारी कर रहा है तो कोई घर की जरूरतों का सामान जुटा रहा है। लेकिन धमतरी नगर निगम में काम करने वाले करीब 450 अधिकारी-कर्मचारियों के लिए त्योहार की खुशियां फीकी पड़ सकती हैं। वजह है अक्टूबर महीने का वेतन अब तक उनके बैंक खातों में नहीं पहुंचना।

नगर निगम के नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों को नवंबर में भुगतान होने वाला अक्टूबर महीने का वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले वेतन अटकने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। उनका यह भी दावा है कि निगम के पास राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है।

Placement Employees: प्रदेश के निकायों को मिली वेतन भुगतान की स्वीकृति, धमतरी में इंतजार

जानकारी के अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के अक्टूबर महीने के वेतन भुगतान की स्वीकृति दे दी है। यह वेतन नवंबर 2026 में दिया जाना है। इसके बावजूद धमतरी नगर निगम के कर्मचारियों को अब तक भुगतान नहीं हुआ है। इस स्थिति को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि जब विभाग की ओर से वेतन भुगतान की स्वीकृति मिल चुकी है, तो फिर धमतरी नगर निगम में भुगतान क्यों अटका हुआ है? कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।

निगम के पास 2.14 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होने का दावा

कर्मचारियों के अनुसार, नगर निगम के पास राजस्व वसूली से प्राप्त करीब 17.50 लाख रुपये और अन्य मदों को मिलाकर लगभग 2 करोड़ 14 लाख रुपये उपलब्ध हैं। कर्मचारियों का कहना है कि निगम के पास इतनी राशि होने के बावजूद अक्टूबर महीने का वेतन जारी नहीं किया जा रहा है। इस मामले में कर्मचारियों ने उपलब्ध राशि और वेतन भुगतान की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि त्योहार से पहले वेतन जारी किया जाना चाहिए, ताकि सभी कर्मचारी अपने परिवार के साथ दीपावली की तैयारी कर सकें।

दीपावली से पहले कर्मचारियों में नाराजगी

दीपावली में अब महज दो दिन शेष हैं। ऐसे में वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। त्योहार के दौरान घर की खरीदारी, बच्चों की जरूरतें और अन्य घरेलू खर्चों के लिए वेतन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नवयुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष मंगलू निर्मलकर ने बताया कि उनके खाते में दो महीने की पीएफ राशि जमा की गई है, लेकिन अक्टूबर महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान की मांग को लेकर शाम को महापौर और नगर निगम आयुक्त से मुलाकात की जाएगी। संघ की ओर से दीपावली से पहले सभी अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन जारी करने की मांग रखी जाएगी।

200 नियमित और 250 प्लेसमेंट कर्मचारी प्रभावित

धमतरी नगर निगम में करीब 200 नियमित और 250 प्लेसमेंट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इस तरह कुल लगभग 450 कर्मचारी अक्टूबर महीने के वेतन का इंतजार कर रहे हैं। निगम के प्रशासनिक कामकाज से लेकर मैदानी स्तर की जिम्मेदारियों तक में इन कर्मचारियों की भूमिका रहती है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी होने से उन्हें हर महीने आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार समय पर सामान की किस्त और दूसरी देनदारियां जमा नहीं हो पातीं। इसके कारण अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना पड़ता है।

Dhamtari News: पार्षदों और एल्डरमैन का मानदेय भी बकाया

वेतन भुगतान में देरी का मामला केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, नगर निगम के पार्षदों और एल्डरमैन को भी सितंबर महीने तक का ही मानदेय दिया गया है। इसके बाद का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। फिलहाल कर्मचारियों की नजर महापौर और निगम आयुक्त से होने वाली मुलाकात पर है। वे चाहते हैं कि दीपावली से पहले वेतन भुगतान का रास्ता निकले, ताकि त्योहार के मौके पर उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।