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इन अष्ट चिरंजीवियों के मात्र नाम लेने से, मनुष्य की आयु होती हैं लंबी

इन अष्ट चिरंजीवियों के मात्र नाम लेने से, मनुष्य की आयु होती हैं लंबी

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Shyam Kishor

Jun 16, 2018

dharma karma

इन अष्ट चिरंजीवियों के मात्र नाम लेने से, मनुष्य की आयु होती हैं लंबी

जिसने जन्म लिया उसकी मृत्यु भी निश्चित हैं, गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही ज्ञान दिया था कि सिर्फ आत्मा अमर है और यह निश्चित समय के लिए अलग-अलग शरीर धारण करती है, शरीर नश्वर है, लेकिन हिंदू शास्त्र व पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार माँ के गर्भ से जन्म लेने वाले आठ ऐसे व्यक्ति हैं, जो चिरंजीवी हैं, अजर अमर हैं, हजारों वर्षों से जीवित हैं, अर्थात इन साथ लोंगो की कभी मृत्यु ही नहीं हुए और ना ही इनकी मृत्यु के आज तक कोई प्रमाण मिले । कहा जाता हैं कि ये आठों किसी न किसी वचन, नियम या श्राप से बंधे हुए हैं और ये सभी दिव्य शक्तियों से परिपूर्ण हैं । योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई हैं वे सारी की सारी शक्तियाँ इन सबमें विद्यमान है । यह परामनोविज्ञान जैसा है, जो परामनोविज्ञान और टेलीपैथी विद्या जैसी आज के आधुनिक साइंस की विद्या को जानते हैं वही इस पर विश्वास कर सकते हैं । हिंदू धर्म के अनुसार ये हैं वे सभी आठ जीवित अजर अमर महामानव ।

अश्वत्थामा बलिव्यासो हनूमांश्च विभीषण: ।
कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन: ॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम् ।
जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित ।।

अर्थात- इन आठ मनुष्य रुपी देवताओं - द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा, दैत्यराज राजा बलि, महर्षि वेद व्यास, श्री हनुमान जी, लंका पति विभीषण, मुनि कृपाचार्य, ब्रह्मर्षि परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि आदि । कहा जाता हैं कि जो भी मनुष्य इन सभी आठों का रोज सुबह-सुबह स्मरण करते है उनकी सारी आधिव्याधियां, रोग, बीमारियां समाप्त हो जाती हैं, और मनुष्य 100 वर्ष की आयु अर्थात शतीयु होता हैं ।

1- श्री महाबली हनुमान जी - अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं श्री हनुमान जी, जब ये लंका की अशोक वाटिका में श्रीराम का संदेश लेकर माता सीता के पास पहुचे थे तब माता सीता ने प्रसन्न होकर इन्हें अजर-अमर होने का वरदान, आशीर्वाद दिया था । अजर-अमर का अर्थ है कि जिसे ना कभी मौत आएगी और ना ही कभी बुढ़ापा । इस कारण भगवान हनुमान को हमेशा शक्ति का स्रोत माना गया है क्योंकि वे चीरयुवा हैं ।

2- मुनि कृपाचार्य- महाभारत के अनुसार कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुलगुरु थे । कृपाचार्य जी ऋषि गौतम के पुत्र हैं ।

3- अश्वथामा- धर्म ग्रंथों में भगवान शंकर के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन उनमें से एक अवतार ऐसा भी है, जो आज भी पृथ्वी पर अपनी मुक्ति के लिए भटक रहा है, और ये अवतार हैं गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का । महाभारत के अनुसार अश्वत्थामा काम, क्रोध, यम व भगवान शंकर के सम्मिलित अंशावतार थे, धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ही अश्वत्थामा को चिरकाल तक पृथ्वी पर भटकते रहने का श्राप दिया था ।

4- ऋषि मार्कण्डेय- भगवान शिव के परम भक्त हैं ऋषि मार्कण्डेय । इन्होंने शिवजी को कठोर तप करके प्रसन्न किया था और महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि के कारण चिरंजीवी बन गए ।

5- विभीषण- लंकापित रावण के छोटे भाई हैं विभीषण । विभीषण श्रीराम के अनन्य भक्त हैं । जब रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया था, तब विभीषण श्रीराम की सेवा में चले गए और रावण के अधर्म को मिटाने में धर्म का साथ दिया, जिससे प्रसन्न हो श्रीराम ने इन्हें अजर अमर लंकापति बना दिया ।

6- राजा बलि- शास्त्रों के अनुसार राजा बलि भक्त प्रहलाद के वंशज हैं । बलि ने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सब कुछ दान कर दिया था । इसी कारण इन्हें महादानी के रूप में जाना जाता है । राजा बलि से श्रीहरि अतिप्रसन्न थे । इसी वजह से श्री विष्णु राजा बलि के द्वारपाल भी बना अजर अमर कर दिया ।

7- ऋषि वेद व्यास- वेद व्यासजी भी अष्ट चिरंजीवी हैं और इन्होंने चारों वेद (ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद) का सम्पादन किया, सभी 18 पुराणों की रचना भी की, महाभारत और श्रीमद्भागवत् गीता की रचना भी वेद व्यास द्वारा ही की गई है । वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र थे ।


8- ब्रह्मर्षि परशुराम- भगवान विष्णु के छठें अवतार हैं परशुराम जी, श्री परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं, परशुराम जी का जन्म समय सतयुग और त्रेता के संधिकाल में माना जाता है ।