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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी पर जरूर पढ़ें कथा, मोक्षदायी है कथा सुनना

हर व्रत का अपना महत्व है, इसकी तिथि और विधि अलग होती है। इनके फल भी अलग होते हैं। लेकिन हर व्रत में कथा (Vrat Katha) जरूर सुननी चाहिए, क्योंकि इसी व्रत की विधि पूरी होती है। इससे व्रत की महिमा का पता चलता है और यह आराध्य के प्रति समर्पण के लिए मन को तैयार करने में मदद करती है। यह मन को श्रद्धा से पूर्ण करने में मददगार बनता है क्योंकि बिना श्रद्धा के कोई व्रत फलित नहीं हो सकता। इसलिए वरुथिनी एकादशी व्रत में भी कथा जरूर पढ़ें, आइये जानते हैं वरुथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha), जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी।
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Pravin Pandey

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Updated: 16 Apr 2023, 1:52 PM IST

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varuthini ekadashi katha

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी। भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि वैशाख कृष्ण एकादशी (vaishakh krishn ekadashi) का नाम वरुथिनी एकादशी है। यह एकादशी सौभाग्य प्रदान करने वाली है, सब पापों को नष्ट करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली है।


भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि प्राचीनकाल में मांधाता नाम के राजा राज्य करते थे। वह अत्यंत दानशील और तपस्वी थे। एक दिन जब वह जंगल में तपस्या कर रहे थे, तभी जंगली भालू आया और राजा मांधाता का पैर चबाने लगा। कुछ देर बाद भालू राजा को घसीटकर जंगल में ले गया, तब राजा घबराया। लेकिन बिना क्रोध किए तपस्वी धर्म निभाते हुए उसने भगवान विष्णु को पुकारा। इस पर भगवान प्रकट हुए और राजा की रक्षा की। लेकिन भालू के पैर चबा लेने की वजह से वह दुखी थे।

ये भी पढ़ेंः Varuthini Ekadashi Vrat 2023: वरुथिनी एकादशी व्रत के दिन ये शुभ योग, पूजा से तृप्त हो जाएंगे पितृ और देव, इसके लिए जान लें व्रत का नियम

इस पर श्रीहरि ने कहा कि तुम मथुरा जाओ और वहां वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो, उसके प्रभाव से तुम्हारा अंग सही हो जाओगे। भालू ने तुम्हें जो काटा वह तुम्हारे पूर्व जन्मों के अपराध का फल था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने वैसा ही किया, जिसके प्रभाव से राजा शीघ्र ही सुंदर और पूर्ण अंग वाला हो गया। बाद में राजा मांधाता स्वर्ग को गया।

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि जो व्यक्ति भय से पीड़ित है। उसे वरुथिनी एकादशी का व्रत रखना चाहिए। इसके प्रभाव सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।