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बेवजह न बनाएं मिर्च-मसालों से दूरी

तीखा खाएंगे तो दीर्घायु पाएंगे। जी हां, चीन में हुए एक शोध के अनुसार खाने में मिर्च-मसालों को शामिल कर लंबा जीवन पाया जा सकता है। इसके...
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Mukesh Kumar Sharma

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May 06, 2018

Chilli

Chilli

तीखा खाएंगे तो दीर्घायु पाएंगे। जी हां, चीन में हुए एक शोध के अनुसार खाने में मिर्च-मसालों को शामिल कर लंबा जीवन पाया जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों ने 30-79 साल के पांच लाख चीनी लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि मिर्च-मसाले वाला भोजन शरीर में वसा को कम करने का काम करता है जिससे मोटापा, डायबिटीज व हार्ट अटैक के खतरे में कमी आती है। जानते हैं इस पर एलोपैथिक व आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की राय।


पित्त होता है नियंत्रित


वैद्य भानु प्रकाश शर्मा के अनुसार खाने में मिर्च का प्रयोग शरीर में गर्मी बढ़ाने व पित्त को संतुलित करने के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी मात्रा व्यक्ति की रोज की आदत व शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करती है।

जो लोग रोजाना मिर्च खाते हंै, उन्हें यह जल्दी नुकसान नहीं करती। लेकिन जो लोग इसे नियमित रूप से खाने के आदी नहीं होते उनके लिए ये पेट में अल्सर, दस्त, बवासीर, लिवर में खराबी व आंतों में सूजन जैसी समस्याएं दे सकती है। ऐसे लोग यदि मिर्च खाते समय साथ में दही, छाछ, नींबू व घी का प्रयोग करें तो मिर्च के दुष्प्रभाव काफी कम हो जाते हैं।


सीमित मात्रा लेना जरूरी


एसएमएस अस्पताल के गैस्ट्रोएन्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. एस. एस. शर्मा के मुताबिक यह लोगों का भ्रम है कि मिर्च खाने से पेट संबंधी समस्याएं होती हैं। इसके प्रयोग से पेट की दिक्कतों का खतरा उन लोगों के लिए होता है जो इसे कभी-कभार खाते हैं या बिल्कुल नहीं खाते।

ऐसे लोग सादा खाना खाने के आदी हो जाते हैं और जब मिर्च खाते हैं तो उन्हें एसिडिटी या पेट में जलन होती है। खाने में नियमित रूप से थोड़ी मिर्च का प्रयोग जरूर करें। इससे आंतों की क्षमता बढ़ती है व अल्सर का खतरा कम होता है। जिन लोगों को पहले से अल्सर, एसिडिटी, कब्ज आदि की समस्या है वे रोजमर्रा में इन रोगों की दवाओं के सेवन के साथ-साथ सामान्य रूप से भोजन में थोड़ी मिर्च का प्रयोग करते रहें क्योंकि दवाओं के साथ मिर्च के सेवन से कोई नुकसान नहीं होता। साथ ही इसके प्रयोग के बाद लिक्विड डाइट जैसे दही, छाछ व पानी का अधिक प्रयोग करें। बवासीर के मरीजों को मिर्च के प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि इससे रोग बढ़ सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।