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Drinking lemonade Benefits: फूड पॉइजनिंग में खाली पेट नींबू पानी पीने से मिलता आराम

Drinking lemonade Benefits: गर्मी में फूड पॉइजनिंग एक आम समस्या है। इसमें न सिर्फ पेट मरोड़ के साथ दर्द होता है, बल्कि डायरिया, उल्टी जैसी समस्याएं भी होती हैं। इसका मुख्य कारण गंदा यानी दूषित पानी पीना है। बर्फ गोला और गन्ने के जूस में बर्फ इस्तेमाल होता है, इससे भी यह संक्रमण हो सकता है। इसी तरह सड़कों के किनारे बिकने वाले समोसे, कचौरियों के साथ चटनी या पतासी के पानी के कारण भी ऐसा हो सकता है। जानते हैं कुछ घरेलू उपायों के बारे में-
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जयपुर

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Jyoti Kumar

•

Updated: 10 Aug 2023, 6:54 PM IST

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Drinking lemonade Benefits

Drinking lemonade Benefits: गर्मी में फूड पॉइजनिंग एक आम समस्या है। इसमें न सिर्फ पेट मरोड़ के साथ दर्द होता है, बल्कि डायरिया, उल्टी जैसी समस्याएं भी होती हैं। इसका मुख्य कारण गंदा यानी दूषित पानी पीना है। बर्फ गोला और गन्ने के जूस में बर्फ इस्तेमाल होता है, इससे भी यह संक्रमण हो सकता है। इसी तरह सड़कों के किनारे बिकने वाले समोसे, कचौरियों के साथ चटनी या पतासी के पानी के कारण भी ऐसा हो सकता है। जानते हैं कुछ घरेलू उपायों के बारे में-

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दही-तुलसी पत्ती खाएं
एक कटोरी दही लीजिए और उसमें तुलसी की पत्तियां, काली मिर्च और थोड़ा-सा नमक डालें। दिन में दो बार इसका सेवन करें। तुलसी की पत्तियों को पानी और चाय की पत्ती के साथ उबालकर काढ़ा बना लें और दिन में दो बार लें। आप चाहें तो हल्की-सी चीनी भी डाल सकते हैं।

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नींबू व सेब का सिरका
खाली पेट नींबू पानी पीना चाहिए। इससे पेट के बैक्टीरिया मरते हैं। नींबू के रस में शहद मिलाकर भी लें। सेब का सिरका शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। यह पेट की अम्लीयता कम करता है। इसलिए खाने से पहले दो चम्मच सिरका एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर लेने से फूड पॉइजनिंग में आराम मिला है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।