डॉक्टर बनकर करना चाहते हैं मरीजों का उपचार
शुभम ने बताया कि दसवी में भी उन्होंने जमकर मेहनत की थी, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं रहा। हालांकि बाद में रि-वैल्युवेशन में परिणाम ९४.५ प्रतिशत रहा। तभी से लक्ष्य बना लिया था कि १२ वीं की परीक्षा में प्रावीण्य सूची में जगह जरूर बनाएगा, इसीलिए उन्होंने लक्ष्य बनाकर तीन से पांच घंटे हर दिन मेहनत की।शुभम का कहना है कि वह आगे एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहता है।