
भारतीय कंपनियों का विदेश से हुआ मोहभंग, 36 फीसदी गिरा निवेश
नई दिल्ली। मोदी सरकार लगातार विदेशी दौरों के जरिए विदेशों में अपनी धाक जमाने मेें लगा है। लेकिन इसका असर भारतीय कंपनियों पर नहीं दिख रहा है। रिजर्व बैंक के आकड़ों में एक खुलासा सामने आया है, जिसके मुताबिक भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी उद्यमों में किया गया निवेश इस साल जुलाई महीने में 36 प्रतिशत से अधिक गिरकर 1.39 अरब डॉलर पर आ गया है। जबकि पिछले साल जुलाई महीने में भारतीय कंपनियों ने विदेशी सहयोगी इकाइयों और संयुक्त उपक्रमों में ऋण, शेयर और गारंटी निर्गम में 2.17 अरब डॉलर निवेश किए थे।
बड़ी कंपनियों का घटा निवेश
जून 2018 में विदेशी परियोजनाओं में घरेलू कंपनियों ने 2.07 अरब डॉलर निवेश किए थे। प्रमुख निवेशकों में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने नीदरलैंड की अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई में 18.739 करोड़ डॉलर निवेश किया। इसके अलावा स्टरलाइट टेक्नॉलजीज ने इटली में 6.667 करोड़ डॉलर, इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज ने ब्रिटेन में 5.465 करोड़ डॉलर और जेएसडब्ल्यू स्टील ने अमेरिका में 5.047 करोड़ डॉलर निवेश किए।
विेदेशी दौरों पर इतना खर्च
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी अब तक 26 देशों की यात्रा कर चुके हैं। एक आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि जून 2014 से जून 2015 के बीच उनकी यात्राओं पर 37 करोड़ रुपये खर्च हुए है। जून 2014 में बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मोदी ने भूटान को चुना। पड़ोसी देश भूटान के साथ भारत के दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं। इसके बाद जुलाई में मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के लिए ब्राजील पहुंचे। यहां चीन, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्राध्यक्षों से उनकी मुलाकात हुई। इसके अलावा सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने जी-4 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। यह ब्राजील, जापान, जर्मनी का भारत का संगठन है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावेदार है। निवेश की बात करें तो भारत में भी विदेशी निवेश पिछले साल काफी गिरा था।

Published on:
04 Sept 2018 07:04 pm
