प्रश्न (4) - चवन्नी किसे कहते हैं?
एक गणना पद्धति के अंतर्गत संख्याएं चार-आठ और सोलह में गिनी जाती थीं। हमारे देश में 1957 में दाशमिक पद्धति यानी सौ की पद्धति लागू हुई। तब रुपए में सौ पैसे और किलो में हजार ग्राम का चलन शुरू हुआ। उसके पहले रुपया सोलह आने का होता था। चौथाई रुपया चार आने का था। चार आने को बोलचाल की भाषा में चवन्नी कहते थे। चूंकि रुपए के मुकाबले चवन्नी छोटी होती थी, इसलिए क्षुद्रता के लिए मुहावरा बन गया, ‘चवन्नी छाप।’