24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

UP Assembly Elections 2022: यूपी की चुनावी रणभूमि में सुरों वाली हुंकार, निरहुआ का ‘योगी-गान’

UP Assembly Elections 2022: इस गीत में 2022 में सीएम योगी की सत्ता में वापसी का ऐलान है तो 2027 में उनकी फिर वापसी का दावा भी है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नोएडा

•

image

Nitish Pandey

•

Updated: 6 Nov 2021, 5:23 PM IST

niruha_1.jpg

UP Assembly Elections 2022: चुनावी मौसम में सियासी दल विरोधियों को संगीत के धुन पर ललकार रहे हैं। एक नया गीत चर्चा में है, भोजपुरी इंड्स्ट्री के गायक, अभिनेता और नेता दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने इस गीत को गाया है। इस गीत की धुन सुरीली है लेकिन आक्रामक हैं। अंदाज ऐसा है जैसे चुनावी रणभूमि में विरोधियों को आर-पार के लिए ललकारा जा रहा है।

यह भी पढ़ें : उर्दू और अरबी के साथ अंग्रेजी-विज्ञान में माहिर होंगे मदरसों के छात्र

चुनावी रणभूमि में सुरों वाली हुंकार

उत्तर प्रदेश के चुनावी रणभूमि में सुरों वाली हुंकार आम बात है। दो महीने के भीतर दिनेश लाल याद उर्फ निरहुआ ने ये दुसरा चुनावी गीत गाया है। दोनों ही गीन में सीएम योगी की सत्ता में धमाकेदार वापसी पर हैं। सितंबर महीने में निरहुआ के गीत के बोल थे आएंगे तो योगी ही तो इस बार के बोल हैं 22 में योगी फिर 27 में योगी। इस गाने में योगी सरकार के विकास कार्यों का जिक्र है। गरीबों के कल्याण योजना से लेकर सूबे में माफिया लगाम की बात को दोहराई गई है।

निरहुआ के गीत का ‘भगवा रंग’

भोजपुरी अभिनेता और गायक दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के बोल एक नए इशारा करने वाले हैं। इसमे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हिंदुओं की पहली पसंद बताया गया है। निरहुआ भाजपा के नेता हैं और उनकी पहचान अब सिर्फ एक गायक और अभिनेता भर की नहीं रह गई है। इसलिए पार्टी के चुनाव अभियान को धार देने वाले इस नए गीत में मुख्यमंत्री योगी को लेकर उनके हर बोल की चर्चा हो रही है।

22 से 27 तक 'विजय ऐलान'

इस गीत में 2022 में सीएम योगी की सत्ता में वापसी का ऐलान है तो 2027 में उनकी फिर वापसी का दावा भी है। दावा ये भी है कि पूरे प्रदेश में इस वक्त सिर्फ और सिर्फ योगी-योगी की धूम है। गीने में दिखाया गया है कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज है।

यह भी पढ़ें : जब सरकार पांच साल चल सकती है किसान आंदोलन क्यों नहीं: राकेश टिकैत