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‘शायद बाबाजी ने मुझे खुद चुना’, ‘हनुमान अंश’ से हुआ धीरेंद्र मुलकलवार के 2 दशकों के संघर्ष का अंत

Dhirendra Mulkalwar Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ के संगीतकार धीरेंद्र मुलकलवार ने 20 साल के संघर्ष के बाद मिली पहली स्वतंत्र फिल्म, नीम करौली बाबा और अपने खास डेब्यू अनुभव के बारे में बताया।
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मुंबई

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Rashi Sharma

Sep 11, 2026

Dhirendra Mulkalwar Hanuman Ansh

‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा के किरदार में शोभिनव सत्या की फोटोज। (फोटो सोर्स: IMDb)

Dhirendra Mulkalwar Hanuman Ansh: लगभग दो दशकों तक, धीरेंद्र मुलकलवार ने लाइमलाइट से दूर रहकर इंडिपेंडेंट प्रोजेक्ट्स, जिंगल्स और म्यूजिक प्रोडक्शन के जरिए अपना करियर बनाया। उन्होंने 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक', 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' और 'आर्टिकल 15' जैसी फिल्मों में म्यूजिक प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। बड़े प्रोडक्शन में अनुभव हासिल करते हुए वो एक पूरी फीचर फिल्म के लिए स्वतंत्र रूप से संगीत तैयार करने के मौके का इंतजार कर रहे थे।

आखिरकार, विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित और नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' के साथ उन्हें यह मौका मिला। धीरेंद्र के लिए ये प्रोजेक्ट फिल्म म्यूजिक डिएक्टर के तौर पर उनके पहले सोलो क्रेडिट से कहीं ज्यादा था। इतना ही नहीं इसका उनके लिए गहरा निजी महत्व भी था, क्योंकि उनका मानना ​​है कि बतौर एक संगीतकार के तौर पर उनकी यात्रा उस आध्यात्मिक हस्ती पर बनी फिल्म से शुरू हुई, जो उनकी आस्था का केंद्र रही हैं।

फिल्मों की ओर बढ़ने पर धीरेंद्र मुलकलवार

म्यूजिक प्रोडक्शन में सालों के अनुभव के बावजूद, विज्ञापन जैसे छोटे फॉर्मेट से निकलकर स्वतंत्र रूप से फिल्म का संगीत तैयार करना धीरेंद्र के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। News18 बातचीत में उन्होंने बताया कि लोग अक्सर सवाल उठाते थे कि क्या छोटे प्रोजेक्ट्स में काम करने वाला व्यक्ति फुल लेंथ वाली फिल्म के पैमाने और जरूरतों को संभाल पाएगा। उन्होंने कहा, "जब आप विज्ञापन जैसे छोटे फॉर्मेट में काम कर रहे होते हैं और फिर फिल्मों की ओर बढ़ने की कोशिश करते हैं, तो लोग अक्सर सोचते हैं कि क्या आप इतने बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट को संभाल पाएंगे।" उन्होंने बताया कि 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक', 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' और 'आर्टिकल 15' जैसी फिल्मों में म्यूजिक प्रोड्यूसर के तौर पर काम करने से उन्हें बड़े प्रोडक्शन की अच्छी समझ मिली। हालांकि, इस काम में उन्हें बतौर संगीतकार सीधे फिल्म निर्माताओं के साथ काम करने का मौका नहीं मिला।

धीरेंद्र को अपने बड़े ब्रेक के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ा

एक संगीतकार के तौर पर अपनी पहली फिल्म पाने तक का उनका सफर आसान नहीं था। इन सालों में धीरेंद्र ने कई प्रोजेक्ट्स साइन किए जो आखिरकार पूरे नहीं हो पाए। कुछ फिल्मों से उन्हें हटा दिया गया, जबकि कई अन्य प्रोजेक्ट्स आगे ही नहीं बढ़ पाए। जब कोई डायरेक्टर उनके साथ काम करना चाहता था, तब भी प्रोड्यूसर कभी-कभी कमर्शियल या दूसरी वजहों से अलग फैसला ले लेते थे। इस वजह से लंबे समय से उनको इंतजार था कि उन्हें किसी फिल्म का पूरा संगीत खुद तैयार करने का मौका मिले। ‘हनुमान अंश’ के साथ आखिरकार उन्हें यह मौका मिल गया।

‘हनुमान अंश’ की कामयाबी ने इस पड़ाव को और भी खास बनाया

धीरेन्द्र के लिए यह मौका और भी खास था, क्योंकि उनकी पहली फिल्म नीम करौली बाबा की कहानी पर बनी थी। उन्हें लगता है कि यह मौका उन्हें किस्मत से मिला। धीरेन्द्र ने कहा, "लेकिन आखिरकार, जैसा कि मैंने कहा, शायद बाबा जी ने ही तय किया था कि एक इंडिपेंडेंट फिल्म कंपोजर के तौर पर मेरा सफर उन्हीं के बारे में बनी फिल्म से शुरू होना चाहिए।" इसके आगे उन्होंने कहा कि फिल्म को मिली कमर्शियल सफलता ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया। सालों तक ऐसे मौके का इंतजार करने के बाद, धीरेन्द्र की एक इंडिपेंडेंट कंपोजर के तौर पर पहली फिल्म दर्शकों से जुड़ गई। उन्होंने कहा, "एक इंडिपेंडेंट कंपोजर के तौर पर मेरी पहली ही फिल्म का इतनी बड़ी कमर्शियल सफलता हासिल करना मुझे बहुत खुशी देता है।"

‘हनुमान अंश’ के बारे में

विशाल चतुर्वेदी द्वारा निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को रिलीज हुई थी और यह नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा को दिखाती है। फिल्म का अंत कहानी को आगे बढ़ाने की गुंजाइश भी छोड़ता है। उम्मीद है कि अगला चैप्टर बाबा की जड़ों यानी उनके जन्मस्थान फिरोजाबाद से शुरू होकर आगरा, मथुरा और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी दूसरी जगहों तक की कहानी दिखाएगा।

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