
नीला ड्रम केस (फोटो सोर्स- ANI)
Neela Drum Murder Case: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत से फांसी की सजा मिलने के बाद अब उनकी 10 महीने की बेटी राधा के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने बच्ची की देखभाल और परवरिश की जिम्मेदारी लेने की इच्छा जताई है। फैजान ने मेरठ जिला अदालत में आवेदन देकर बच्ची की शिक्षा, इलाज, कपड़े और दूसरी जरूरतों का खर्च उठाने की पेशकश की है।
फैजान अंसारी ने अदालत के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के सरकारी वकील से भी मुलाकात की और राधा की जिम्मेदारी लेने की इच्छा जाहिर की। उनका कहना है कि वो बच्ची को बेहतर माहौल देना चाहते हैं और उसकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर इलाज तक का खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने आवेदन के साथ अपनी आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी भी अदालत के सामने रखी है।
फैजान अंसारी मुंबई में रहने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और ब्रांड प्रमोटर बताए जाते हैं। वह सोशल मीडिया पर चर्चित मामलों, बॉलीवुड और सेलिब्रिटी से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रियाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनके वीडियो को सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज मिलने का दावा किया जाता है। इंस्टाग्राम पर उनके 1 मिलियन फॉलोअर्स हैं।
हालांकि, मुस्कान की बेटी की जिम्मेदारी लेने का उनका फैसला उन्हें एक बार फिर चर्चा में ले आया है। फैजान का कहना है कि उनका यह कदम किसी तरह की पब्लिसिटी या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए नहीं है। वह चाहते हैं कि बच्ची को जेल के माहौल और इस पूरे मामले के प्रभाव से दूर एक बेहतर जीवन मिल सके।
मुस्कान की छोटी बेटी राधा का जन्म जेल में हुआ है और उसकी उम्र फिलहाल करीब 10 महीने बताई जा रही है। उसके पिता सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उसकी मां मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई है।
ऐसे में बच्ची की देखभाल और भविष्य को लेकर कानूनी सवाल भी खड़े हो गए हैं। फैजान की ओर से आवेदन दिए जाने के बाद अब यह मामला अदालत और संबंधित बाल संरक्षण व्यवस्था के सामने है।
किसी बच्चे को केवल अदालत में आवेदन देने या परिवार की सहमति से सीधे गोद नहीं लिया जा सकता। भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया कानून के तहत होती है। खासकर अगर बच्चे के माता-पिता जीवित हैं, लेकिन जेल में हैं, तो बच्चा अपने आप गोद लेने के लिए उपलब्ध नहीं हो जाता।
बच्चे की स्थिति के अनुसार किशोर न्याय अधिनियम, 2015, दत्तक ग्रहण विनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यदि बच्चा कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही दत्तक ग्रहण आगे बढ़ सकता है। बच्चे के सर्वोत्तम हित को इसमें सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
फैजान ने अपने इस फैसले पर बात करते हुए कहा कि मुस्कान और साहिल की फांसी में 10 महीने की बेटी की वजह से ढील मिल रही है इसलिए वो चाहते हैं वो राधा को गोद ले लें।
फैजान अंसारी के आवेदन के बाद फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि अदालत और संबंधित बाल संरक्षण अधिकारी इस मामले में क्या फैसला लेते हैं। बच्ची की अभिरक्षा या गोद लेने का अधिकार केवल इच्छा जताने से नहीं मिल सकता। इसके लिए सभी कानूनी शर्तें पूरी करनी होंगी।
फैजान का कहना है कि अगर उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो वह राधा की पढ़ाई, इलाज और दूसरी जरूरतों का पूरा ध्यान रखेंगे। वहीं, इस पूरे मामले में अंतिम फैसला कानून और बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित सक्षम प्राधिकारी ही करेगा।
Updated on:
22 Oct 2026, 6:17 PM IST
Published on:
22 Oct 2026, 6:14 PM IST
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