
कुमार विश्ववास ने युवा पीढ़ी पर दिया बयान (Photo Source- Instagram/@narendramodi)
Kumar Vishwas On Gen Z Abuse PM Modi: अपनी बयानबाजी और कविताओं के लिए मशहूर डॉ. कुमार विश्वास हमेशा अपनी बेबाक राय रखते नजर आते हैं। राजनीति हो या इंडस्ट्री की पोल खोलना वह किसी के बारे में कुछ भी बोलने से कतराते नहीं हैं। इस बार भी वह चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस बार कुमार विश्वास के निशाने पर देश की युवा पीढ़ी Gen Z हैं। उन्होंने जंतर-मतर पर पीएम मोदी को गाली देने वाली घटना को लेकर कहा कि जब ये बच्चे बड़े होंगे और नौकरी करेंगे तब इन्हें हनुमान जी याद आएंगे।
कुमार विश्वास ने आजतक के विशेष कार्यक्रम 'सुरक्षा सभा' में देश के बच्चों पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं को कहा कि सोशल मीडिया या चौराहों पर देश के बुजुर्ग नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना किसी तरह की 'कूल' या बहादुरी की बात नहीं है।
कुमार विश्वास ने कहा, "आज चौराहे पर खड़े होकर 76 साल के प्रधानमंत्री को मां-बहन की गाली देकर अगर तुम यह समझते हो कि तुम 'कूल' हो गए तो हो जाओ, बड़ी अच्छी बात है। वहीं, प्रधानमंत्री ने भी उन्हें माफ करते हुए कह दिया कि मेरे बच्चे हैं, माफ कर दो। भैया! वो प्रधानमंत्री है बड़े आदमी हैं, माफ कर सकते हैं। मैं भी क्या ही कहूं, मुझे भी खूब गालियां पड़ती हैं और मैं भी माफ ही करता हूं। लेकिन असली दुनिया की कसौटी अभी बाकी है।"
युवाओं को भविष्य की आर्थिक व सामाजिक जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए कुमार विश्वास ने चेतावनी दी कि जिंदगी हमेशा सोशल मीडिया के लाइक्स और कमेंट्स पर नहीं चलती। जब इन युवाओं का सामना असली जीवन के संघर्षों से होगा, तब उन्हें जमीन पर उतरना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, "अभी जरा दुनिया की सच्चाई में आओ। 5-6 साल बाद बेटा जब सड़क पर आओगे, नौकरी तलाशोगे, घर के खर्चे देखोगे और जब शादी होगी तो जीवनसाथी की उम्मीद भरी निगाहें देखोगे कि उसे स्कूटर पर पीछे किधर बिठाऊं? Alto लूं या कोई दूसरी गाड़ी? तब समझ आएगा कि असल जिंदगी क्या है? उस समय घर में रखे सारे देवी-देवता और ईश्वर तुम्हें याद आएंगे और तुम यही कहोगे कि- 'हे हनुमान जी! कृपा करो, मारुति नंदन बचा लो।'"
कुमार विश्वास के इस बयान ने देश भर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां उन्होंने भाषा की मर्यादा बनाए रखने की सीख दी, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को आगाह किया कि क्षणिक उत्साह में आकर अपनी सभ्यता और संस्कारों को भूलना भारी पड़ सकता है। जब तक कंधों पर घर-परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ नहीं आता, तब तक ट्रोलिंग आसान लगती है, लेकिन व्यावहारिक जीवन की राह में ईश्वर का स्मरण ही काम आता है।
Updated on:
09 Sept 2026 12:45 pm
Published on:
09 Sept 2026 12:38 pm
