
मनोज बाजपेयी ने याद किया मुश्किल दौर ( सोर्स: x-@filmfare/@iAshu21)
Manoj Bajpayee Films: एक्ट्रेस मनोज बाजपेयी ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें मनचाहा काम नहीं मिल रहा था और जिन फिल्मों में उन्होंने काम किया, उनसे भी वे खुश नहीं थे। इस मुश्किल दौर में 'राजनीति', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'स्पेशल 26' जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई राह दिखाई। अब एक्टर ने बताया है कि कैसे उन्होंने खुद निर्देशकों से कनेक्ट करना शुरू किया और अपनी पसंद की फिल्मों का हिस्सा बनने की कोशिश की।
एक इंटरव्यू में बातचीत के दौरान मनोज ने न सिर्फ अपने करियर के मुश्किल दौर को याद किया, बल्कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच सिनेमा और रचनात्मकता की भूमिका पर भी बात की। हाल ही में 'गजब रात' में दिखें एक्टर का मानना है कि मुश्किल वक्त के बाद इंसान खुद को संभालता है और नई शुरुआत करता है।
मनोज बाजपेयी ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब उन्हें वैसा काम नहीं मिल रहा था, जैसा वे करना चाहते थे। इसके चलते उन्होंने कई फिल्मों के प्रस्ताव ठुकरा दिए। उन्होंने एक्सेप्ट किया कि जिन कुछ फिल्मों के लिए उन्होंने हां कहा, उन्हें करके भी उन्हें संतुष्टि नहीं मिली।
मनोज बाजपेयी के अनुसार, इसी दौर में उन्होंने अपनी पसंद की कहानियों और फिल्मकारों की तलाश शुरू की। उनकी मुलाकात निर्देशक नीरज पांडे से हुई, जिनके साथ उन्होंने सिनेमा को लेकर लंबी बातचीत की। मनोज ने बताया कि उन्होंने नीरज की फिल्म 'अ वेडनेसडे' देखी थी। इसके बाद दोनों की मुलाकात हुई और नीरज ने उन्हें अपने फिल्म बनाने के तरीके के बारे में बताया। इसी दौरान मनोज की मुलाकात निर्देशक प्रकाश झा से भी हुई और अनुराग कश्यप के साथ उनकी बातचीत चल रही थी। इन मुलाकातों के करीब एक साल बाद उन्हें 'राजनीति', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'स्पेशल 26' जैसी फिल्मों में काम करने का मौका मिला।
मनोज अब अपने करियर को लेकर एक अलग रणनीति अपनाते हैं। वे हर सुबह कम से कम एक निर्देशक को फोन करते हैं और उन्हें बताते हैं कि वे उनके साथ काम करने के लिए उपलब्ध हैं। एक्टर का कहना है कि कई बार नए निर्देशकों को उन तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिल पाता। ऐसे में उनकी ओर से की गई पहल फिल्मकारों के लिए काम आसान कर देती है।
मनोज का जोर एक साल में लगातार कई फिल्में करने के बजाय ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनने पर है, जिन पर उन्हें गर्व हो सके। वे चाहते हैं कि उनकी फिल्मोग्राफी में ऐसी कहानियां शामिल हों, जो उन्हें एक कलाकार के तौर पर संतुष्टि दें और उन्हें अपने काम के प्रति उत्साहित रखें। वे नए और पुराने दोनों तरह के निर्देशकों के साथ काम करने के मौके तलाशते रहते हैं। इस तरह वे अपने करियर में नए अध्याय की शुरुआत करना चाहते हैं और ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनना चाहते हैं, जिनमें उन्हें फिर से कुछ नया करने का मौका मिले।
इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संकटों और विरोध-प्रदर्शनों पर भी बात की। उनका मानना है कि मौजूदा दौर में सिनेमा और रचनात्मकता भी इन परिस्थितियों से अछूते नहीं रह सकते। हालांकि, उन्हें भरोसा है कि मुश्किल हालात के बावजूद रचनात्मक लोग नए रास्ते तलाश लेंगे।
'सत्या' और 'द फैमिली मैन' जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए पहचाने जाने वाले मनोज बाजपेयी का करियर इस बात की मिसाल है कि सही कहानियों और फिल्मकारों के साथ काम करने के लिए पहल करना कितना अहम हो सकता है। उनके लिए अब फिल्मों की संख्या से ज्यादा जरूरी ऐसी फिल्में करना है, जिनसे उन्हें एक कलाकार के तौर पर संतुष्टि मिले।
Updated on:
28 Oct 2026, 1:00 PM IST
Published on:
28 Oct 2026, 1:00 PM IST
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