
पंचम दा-आशा भोसले की अनोखी दास्तान। (फोटो सोर्स: IMDb)
R.D. Burman and Asha Bhosle Love Story: बॉलीवुड के महान संगीत सग्राट R. D. Burman की आज बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 27 जून, 1939 को कोलकाता में हुआ था। आर.डी. बर्मन ने 3 दशकों तक अपने गानों से दर्शकों का मनोरंजन किया। आरडी बर्मन को बॉलीवुड मे 'पंचम दा' के नाम से भी जाता है। बर्मन की शादी बॉलीवुड की मशहूर सिंगर आशा भोंसले से शादी की थी। आशा के संग शादी करना बर्मन के लिए आसान नहीं था। इस बात को लेकर बर्मन की मां ने उन्हें धमकी तक दे डाली थी। आइए इस खास मौके पर जानते हैं आर.डी.बर्मन की जिंदगी से जुड़ी कई खास बातें…
पंचम दा की याद में Ministry of Information & Broadcasting ने अपने X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट शेयर किया है।
जीवनसाथी बनने से बहुत पहले ही, आशा भोसले और आर.डी. बर्मन एक ऐसी चीज़ से जुड़े थे और वो था दोनों एक संगीत। उनकी पहली मुलाकात 1950 के दशक में हुई थी, जब वे पहली बार मिले, तो भोसले इंडस्ट्री में पहले से ही एक जाना-माना नाम थीं, जबकि बर्मन ने अभी अपना करियर शुरू ही किया था। असल में, बर्मन उस आशा भोसले के पास उनका ऑटोग्राफ लेने गए थे!
उस मुलाकात को याद करते हुए आशा भोसले ने एक बार DNA को बताया था, "उस लड़के ने मुझसे ऑटोग्राफ मांगा और कहा कि उसने रेडियो पर मेरा मराठी नाट्य संगीत सुना है।" इसके साथ ही आशा जी ने आर डी बारमैन को मोटे चश्मे वाला, दुबला-पतला और हल्के रंगत वाला लड़का बताया था।
जल्द ही उनकी दोस्ती गहरी हो गई और वे साथ मिलकर काम करने लगे। उनके करियर का अहम मोड़ 'तीसरी मंजिल' (1966) के साथ आया, जो किसी फिल्म के लिए उनका पहला साथ काम करना था। इसने हिंदी फिल्म संगीत के अंदाज को पूरी तरह बदल दिया। बर्मन की बोल्ड और वेस्टर्न स्टाइल वाली धुनों और भोसले की चंचल और दिलकश आवाज के मेल से एक ऐसी म्यूजिकल भाषा बनी जो नई, बिंदास और पूरी तरह से उनकी अपनी थी।
आरडी बारमैन और आशा भोसले के 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम' और 'चुरा लिया है तुमने' जैसे गानों ने कल्चर में बदलाव लाए और बॉलीवुड में महिला की इच्छाओं और रिदम को दिखाने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित किया।
भोसले और बर्मन के साथ दिए गए आखिरी इंटरव्यू में से एक में, आशा भोसले ने बताया कि जब वो रिकॉर्डिंग स्टूडियो में होती थीं, तो बर्मन अक्सर उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेजते थे। फूल बिना नाम के भेजे जाते थे और वह अक्सर उन्हें फेंक देती थीं। इंटरव्यू में आशा भोसले ने याद करते हुए कहा, "सालों तक, वो मुझे बिना नाम के फूल भेजते रहे। एक दिन, मजरूह साहब और पंचम की मौजूदगी में गुलाब आए। मैंने कहा, 'इन्हें फेंक दो। कोई बेवकूफ मुझ पर अपने गुलाब बर्बाद कर रहा है।' पंचम का चेहरा उतर गया। तभी मजरूह साहब हंसे और बोले, 'यही बेवकूफ तुम्हें गुलाब भेज रहा है'।"
उसी इंटरव्यू में, आशा ताई ने ये भी बताया कि उन्होंने आर.डी. बर्मन के लिए हां क्यों कहा। उन्होंने बताया था, "वह कहते थे, 'आशा, सिर्फ तुम ही समझती हो। तुम चाहकर भी कभी सुर से भटक नहीं सकतीं। उनकी ये बात मुझे अच्छी लगी, लेकिन मैं दोबारा शादी करने की गलती नहीं करना चाहती थी।"
इसके आगे उन्होंने बताया था, "ये मेरे पीछे पड़े थे, आशा तुम्हारा सुर बहुत अच्छा है, मैं तुम्हारी आवाज पर फिदा हूं। आखिरकार, क्या करती? ठीक है, कर लिया।"
आशा भोसले और आर.डी. बर्मन की लव स्टोरी को जो बात खास तौर पर दिल को छू लेने वाली बनाती है, वो ये है कि ये लवस्टोरी जवानी के आदर्शवाद में शुरू नहीं हुई थी। एक-दूसरे से मिलने से पहले दोनों मुश्किल शादियों से गुजर चुके थे।
बता दें कि आशा भोसले 16 साल की उम्र में लता मंगेशकर के सेक्रेटरी के साथ भाग गई थीं, जो उनसे 15 साल बड़े थे। उन्होंने अपना सिंगिंग करियर जारी रखा, जिसे उनके 'रूढ़िवादी' ससुराल में पसंद नहीं किया जाता था। उन्होंने दुर्व्यवहार और मानसिक पीड़ा का सामना किया, और यहां तक कि अपनी जान देने के बारे में भी सोचा था। फिर भी, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने तीसरे बच्चे, आनंद भोसले के साथ गर्भवती होने के बावजूद अपने पहले पति से अलग हो गईं।
वहीं, आशा भोसले के करीब आने से पहले आर.डी. बर्मन का भी तलाक हो चुका था। शायद इसी वजह से उनका रिश्ता ज्यादा मजबूत और गहरा बना। 1980 में एक सिंपल और निजी समारोह में जब उन्होंने शादी की थी। असल में, इस शादी ने उस समय के रिवाजों को भी तोड़ा क्योंकि भोसले 46 साल की थीं और बर्मन 40 साल के! बता दें कि आरडी बर्मन की मां को ये रिश्ता बिलकुल भी पसंद नहीं था। उन्होंने यह तक कह दिया था कि मेरे जीते जी यह शादी नहीं हो सकती है। इसके बाद पंचम दा अपनी मां के पास गए और उनका पैर छुआ और उन्होंने आशा भोंसले से शादी की अनुमति मांगी। पंचम दा के ऐसा करने पर मां गुस्से से कांपती हुई बोली, 'मेरी बात सुनो पंचम, जब तक मैं जिंदा हूं, ये शादी नहीं हो सकती। तुम चाहो तो ऐसा केवल मेरी लाश पर कर सकते हो।'
उनके निजी रिश्ते का असर बॉलीवुड संगीत के सबसे बेहतरीन दौर में भी दिखा। इस जोड़ी ने कई हिट गाने दिए और पंचम दा ने अपना खास फ्यूजन संगीत दिया और भोसले ने मुश्किल गाने गाकर अपनी गायकी का हुनर दिखाया।
हालांकि, उनकी शादी किसी परी-कथा जैसी नहीं थी। जल्द ही उनके रिश्ते में परेशानियां आने लगीं। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से इंडस्ट्री में आए बदलाव से हुई और पंचम दा को काम कम मिलने लगा। इसके चलते वो शराब पर निर्भर हो गए, जिससे उन्हें शराब की लत लग गई और उनकी सेहत बिगड़ने लगी। वहीं, भोसले काम में व्यस्त रहती थीं, जिससे उनके बीच दूरियां आ गईं। ये कपल अलग-अलग रहने लगा, फिर भी 'इजाजत' जैसे प्रोजेक्ट्स पर साथ काम करता रहा।
4 जनवरी 1994 को दो बार हार्ट अटैक आने के बाद 54 साल की उम्र में बर्मन का निधन हो गया। पत्रकार अजिताभ मेनन की एक यादों भरी किताब में बताया गया है कि आशा भोसले उस कमरे में जाने से इनकार कर दिया था जहां उनका पार्थिव शरीर रखा था। उन्होंने कहा था, "मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी। मैं उन्हें मरा हुआ नहीं देख सकती। मैं उन्हें जिन्दा देखना चाहती हूं।" तब गुलजार साहब ने उन्हें सांत्वना दी थी।
आशा भोसले और आर.डी. बर्मन को हमेशा संगीत ने ही जोड़े रखा। अपने रिश्ते के बारे में बताते हुए भोसले ने एक इंटरव्यू में कहा था, "संगीत हमारी शादी की नींव थी: हम घंटों तक बिस्मिल्लाह खान, द बीटल्स, शर्ली बैसी… और न जाने कितनों को सुनते रहते थे। पंचम सुबह 9:30 बजे लुंगी-कुर्ता पहनकर नहाकर निकलते थे और दोपहर 3 बजे तक हम जॉन कोल्ट्रेन, अर्थ विंड एंड फायर, सर्जियो मेंडेस, सैंटाना, द रोलिंग स्टोन्स, ब्लड स्वेट एंड टीयर्स, चक कोरिया, ओसिबिसा… और न जाने कितनों के एल्बम पर साथ-साथ गुनगुनाते रहते थे। हमारी संगीत की पसंद अलग-अलग थी, लेकिन यही चीज हमें एक-दूसरे से जोड़ती थी। यही हमारा मजबूत रिश्ता था।
Published on:
27 Jun 2026 10:10 am
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