
सांकेतिक तस्वीर फोटो सोर्स AI
Gonda News : गोंडा में दहेज के लिए प्रताड़ित की गई विवाहिता की मौत के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के बाद सेशन कोर्ट ने आरोपी बीरबल को दोषी ठहराते हुए 12 साल के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। हालांकि, इसी मामले में आरोपी मलखान और पूरनमल को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। लंबी सुनवाई के बाद।
गोंडा के कोतवाली देहात क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न के बाद विवाहिता की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी बीरबल को दोषी करार दिया है। सेशन जज दुर्ग नारायण सिंह ने उसे 12 साल के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, मामले में आरोपी मलखान और पूरनमल को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। मामले की शुरुआत त्रिवेणी प्रसाद निवासी लक्ष्मणपुर जाट, गोसाईंपुरवा की शिकायत से हुई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी पूजा की शादी वर्ष 2015 में कोतवाली देहात क्षेत्र के ठकुरापुर गांव के रहने वाले वीरवल पुत्र पूरनमल के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर पूजा को परेशान करते थे।
शिकायत में मोटरसाइकिल, फ्रिज और कूलर की मांग किए जाने तथा पूजा के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। वर्ष 2020 में ससुराल वालों ने पूजा के साथ मारपीट कर उसे मायके छोड़ दिया था। इस संबंध में त्रिवेणी प्रसाद ने 23 जुलाई 2020 को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद महिला थाने में पंचायत हुई और सुलह-समझौते के बाद दो महीने पहले पूजा को दोबारा ससुराल भेजा गया था।
आरोप के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2021 की सुबह करीब चार बजे पूजा के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने एकराय होकर कपड़े से उसका गला कस दिया। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसे डॉ. ओएन पांडेय नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। पूजा को भर्ती कराने के बाद आरोपी वहां से चले गए। उपचार के दौरान पूजा की मौत हो गई।
घटना के बाद त्रिवेणी प्रसाद की तहरीर पर कोतवाली देहात थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मामले की पैरवी की गई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए।
पुलिस के मुताबिक, मॉनिटरिंग सेल, जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) बसंत शुक्ला, कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल मार्कण्डेय सिंह और थाना कोतवाली देहात के पैरोकार कांस्टेबल अतुल सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने बीरबल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। वहीं, मलखान और पूरनमल को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया।
Updated on:
3 Nov 2026, 6:23 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 6:23 PM IST
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