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वन स्टॉप सेंटर में ताले के भीतर मिली पीड़ित महिलाएं, डीएम रह गई दंग, जानिए पूरा मामला

वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को यहां पर ताले के भीतर रखा जाता है। यहां की व्यवस्था देख डीएम भड़क गई। कई खामियां पाए जाने पर डीएम ने कड़ी फटकार लगाई। आइए जानते हैं, वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं।  
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गोंडा

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Mahendra Tiwari

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Updated: 21 Aug 2023, 4:32 PM IST

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केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना वन स्टाफ सेंटर कर्मचारियों के लापरवाही की वजह से अव्यवस्था का शिकार हो गया है। यहां पर घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को ताले के भीतर रखे जाने पर डीएम को गुस्सा आ गया। उन्होंने कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए। कहां की इन्हें बंदी जैसे निरुद्ध नहीं रखा जा सकता है। इन्हें स्वतंत्र रूप से रहने दीजिए। महिला आरक्षी की तैनाती है। वह इनकी देखरेख करें।

घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे सारी सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। गोंडा जिला चिकित्सालय परिसर में स्थित वन स्टॉप केंद्र तक पहुंचाने के लिए आपको एक सकरे रास्ते से गुजरना पड़ेगा। मतलब यहां तक पहुंचने के लिए कोई समुचित रास्ता भी नहीं है। डीएम नेहा शर्मा सोमवार को अचानक वन स्टाफ सेंटर का जायजा लेने पहुंच गई। यहां की व्यवस्था देख डीएम को गुस्सा आ गया। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को ताले के भीतर रखा जाता है। महिलाओं को बंदी की तरह रखे जाने पर डीएम ने सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इन्हें बंदी जैसे नहीं रखा जा सकता है। यहां पर आरक्षी की तैनाती है। वह उनकी देखरेख करें। इसके लिए वहां मौजूद स्टाफ को डीएम ने कड़ी फटकार लगाई। मौके पर वन स्टाफ केंद्र की इंचार्ज डीएम को नहीं मिली, पता चला कि वह तीन दिनों से लगातार अनुपस्थित चल रही हैं। यहां से तीन महिलाओं को उनके परिजनों को सौपा गया है। रजिस्टर में उनका कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। डीएम ने इसे बड़ी लापरवाही माना और कहा कि इसके लिए सेवा प्रदाता संस्था से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बता दे कि वन स्टॉप सेंटर के मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी प्रोबेशन विभाग की होती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी इसके मुखिया होते हैं। वन स्टाफ सेंटर के माध्यम से घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सीय सुविधा रहने, खाने पीने की व्यवस्था, प्राथमिकी और कानूनी सलाह सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। यहाँ पर घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला और उनके परिजनों को बुलाकर सबसे पहले काउंसलिंग कर उनकी मूल समस्या की जानकारी ली जाती है। इसके बाद सुलह समझौता न होने की दशा में प्राथमिकी, विधि सलाहकार तथा संबंधित महिला को अधिकतम पांच दिनों तक इस सेन्टर पर रखने के बाद उसे शिफ्ट करा दिया जाता है।

वन स्टाफ सेंटर पर खामियां देख भड़की डीएम, बोली एक्शन लिया जाएगा

वन स्टॉप सेंटर का जायजा लेने के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए डीएम नेहा शर्मा ने बताया कि यहां पर मुझे अव्यवस्था मिली है। यहां पर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर पर इंचार्ज के रूप में जिनकी तैनाती की गई है। वह उपस्थित नहीं पाई गई। यहां पर जो तीन पीड़िताएं थी। उनको ताले के भीतर रखना उचित नहीं है। उनको निरुद्ध जैसा रखना ठीक नहीं है। यहां पर आरक्षी की तैनाती वह इनकी देखरेख करें। खानपान की व्यवस्था ठीक मिली है। टॉयलेट में गंदगी पाई गई है। उन्होंने केंद्र को जाने वाले रास्ते को व्यवस्थित करने की बात कही। पीड़ित महिलाओं को अभिलेखों में दर्ज किए बिना परिजनों को सौपे जाने के सवाल पर कहा कि यह लापरवाही है। जिन्हें दर्ज करना है। वह 3 दिन से अनुपस्थित चल रही हैं। इस पर एक्शन लिया जाएगा।