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यूपी का सबसे बड़ा राजनैतिक बदलाव, बसपा-सपा-निषाद दल आए एक साथ

दो धुर विरोधी दलों के साथ आने से सत्ताधारी दल के होश उड़े
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 4 Mar 2018, 1:50 PM IST

phulpur loksabha bye election

फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की बजी रणभेरी

गोरखपुर। संसदीय उपचुनाव में राजनैतिक समीकरण कुछ ही घंटों में बदल गए हैं। नए समीकरणों को आकार देने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने वैसे तो कई घंटों पहले ही अपने नेताओं को निर्देश दे दिए थे। गोरखपुर में इस आगाज को अंजाम तक पहुंचा दिया गया। बंद कमरे में नए समीकरण की इबारत लिखी गर्इ। बसपा के घनश्याम खरवार, सपा एमएलसी उदयवीर सिंह, सपा जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के बीच वार्ता हुर्इ आैर सभी ने एक साथ आकर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रवीण निषाद के समर्थन में आने का एेलान किया।

इस बैैठक से आ जाएगा सियासी भूचाल

गोरखपुर में बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक के बाद संभावना जताई जा रही है कि बसपा के कोआर्डिनेटर समाजवादी पार्टी को समर्थन का ऐलान करेंगे। राजनीति को समझने वाले यह मानते हैं कि बसपा और सपा के एक साथ आने सियासी क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावना है। सबसे अहम यह कि यादव-मुस्लिम वोटबैंक वाले सपा को दलितों का एकमुश्त वोट मिलने से कई अन्य राजनैतिक दलों की चूलें हिल सकती है।
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक सियासत में पिछडे़ वोट बैंक का बहुत ही महत्व है। दलित बाहुल्य इस क्षेत्र में यादव व मुसलमान मतदाताओं की भी बहुलता है। चूंकि, निषाद समुदाय के नेता डाॅ.संजय निषाद की पार्टी का सपा को समर्थन प्राप्त है। साथ ही मुसलमानों को राजनीतिक प्लेटफार्म देने वाले पीस पार्टी के नेता डाॅ.अयूब भी समर्थन में हैं। ऐसे में बसपा के साथ आने से भाजपा को रणनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है। दलित वोट बैंक का इस संसदीय क्षेत्र में महत्व को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि दो बड़ी बिरादरी ठाकुर और ब्राह्मण के एक मंच पर साथ आने के बाद भी भाजपा निषाद बिरादरी के वोट बैंक में सेंधमारी की हर जुगत लगा रही। आज इसीलिए अनुसूचित जाति सम्मेलन कराया जा रहा ताकि दलित वोट का कुछ हिस्सा बटोरा जा सके।
हालांकि, सपा-बसपा के साथ आने और छोटे दलों के समर्थन से सियासी तौर पर किसका नफा और किसको नुकसान होगा यह आने वाला समय तय करेगा लेकिन एक बात तो साफ है कि इस नए समीकरण के संकेत ने कई मजबूत दलों के होश जरूर उड़ा दिए हैं।