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यूजीसी के पत्र का हवाला देकर नियुक्ति रोकने की मांग करने पर दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस

डीडीयू शिक्षक नियुक्ति प्रकरण
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डीडीयू

कहते हैं कि शिक्षक समाज को आईना दिखाता है, अन्याय/अनाचार के खिलाफ आवाज उठाता है। लेकिन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महज सवाल करना दो शिक्षकों को भारी पड़ गया।
विवि के प्रो.चंद्रभूषण अंकुर और प्रो. अनिल यादव ने कुलपति को पत्र लिखकर 18 अप्रैल को यूजीसी द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से शिक्षक चयन प्रक्रिया रोके जाने बाबत नियमों की सूचना दी थी। विवि में चल रही नियुक्तियों के खिलाफ नियमों का हवाला देते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने को विवि ने आचार संहिता का उल्लंघन माना है। इनको कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया।
विवि में दो सौ से अधिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर बीते दिनों नियुक्तियां शुरू हुई थी। लेकिन नियुक्तियों में आरक्षण के प्राविधानों को दरकिनार करने का आरोप लगा। आरक्षण के अनुपालन के लिए बीते दिनों डीडीयू के पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद के अध्यक्ष व इतिहास विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रोे.चंद्रभूषण अंकुर और परिषद के महामंत्री व वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर डाॅ.अनिल यादव ने कुलपति को संगठन की ओर से पत्र लिखा था। इनके द्वारा पत्र के माध्यम से बताया गया कि यूजीसी ने तत्काल प्रभाव से सभी विश्वविद्यालयों में जारी शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रियाओं को रोकने का निर्देश दिया है। ऐसे में विवि में चल रही चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक देने चाहिए।
संगठन से जुड़े दोनों शिक्षकों के यूजीसी के पत्र का पूरा विवरण देते हुए विवि में चल रही नियुक्तियों को रोकने के संबंध में लिखे गए पत्र को विवि ने नियमसंगत नहीं माना है। शिक्षक होने के बावजूद ऐसा पत्रव्यवहार करने पर विवि के कुलपति की ओर से इन दोनों शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है। हालांकि, दोनों शिक्षक इस तरह के पत्र व्यवहार को किसी भी तरह से गलत नहीं मानते हैं। इनका मानना है कि विवि के कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया गया है।