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Terror Funding आतंक को प्रश्रय देने वालों के लिए गोरखपुर अंचल बना मुफीद

बब्बर खालसा से लेकर इंडियन मुजाहिद्दीन तक के आतंकी इस क्षेत्र से पकड़े जा चुके हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा से ये हो जाते सफल
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 26 Mar 2018, 9:09 AM IST

ISIS terrorist

ISIS terrorist

गोरखपुर। आतंक को प्रश्रय देने वालों के लिए गोरखपुर अंचल काफी मुफीद बन चुका है। इस क्षेत्र के कई जिलों का नेपाल सीमा से लगे होना और कुछ जिलों का बिहार से जुड़ाव देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करने वालों को सुविधादायक बनता जा रहा। गोरखपुर, कुशीनगर, खलीलाबाद और आसपास जनपदों से आतंकी फंडिंग में लगे लोगों की गिरफ्तारियों के पहले भी इन क्षेत्रों में कई दुर्दांत आतंकी सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। इंडियन मुजाहिद्दीन का यासीन भटकल हो या संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक डॉ.जावेद या साल भर पूर्व पकड़ा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का नासीर अहमद वानी, ये सब इसी अंचल से होकर देश में आतंक फैलाने की फिराक में पकड़े जा चुके हैं।
करीब दो साल पहले 2016 में कुशीनगर के कसया में मुंबई व वाराणसी एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रिजवान नामक एक युवक को पकड़ा था। इंटरमीडिएट में पढ़ने वाला यह युवा आईएस से जुड़कर युवाओं को तैयार कर रहा था। एटीएस की पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि उसने नेपाल तक अपनी जड़े मजबूत की थी। गोवा और दक्षिण के एक शहर में अपना सेफ जोन बनाकर गतिविधियों को संचालित कर रहा रिजवान पूर्वांचल के युवाओं को अपने दहशत के व्यवसाय में जोड़ रहा था और इसके लिए सोशल मीडिया का भी दुरूपयोग उसके साथी खूब कर रहे थे। यही नहीं इसी साल जनवरी में ही कुशीनगर सहित देश के विभिन्न कोनों से करीब 27 लोग एटीएस ने गिरफ्तार किए थे। ये लोग देश की सुरक्षा को धता बताकर इंटरनेशनल काॅल कराते थे। इनमें से आधा दर्जन लोग कुशीनगर के ही थे।
हालांकि, यह गतिविधियां इधर बीच नहीं शुरू हो सकी हैं। कई दशक पहले से आतंकी गतिविधियों को संचालित करने वाले इस क्षेत्र को इस्तेमाल करना शुरू कर दिए थे। हालांकि, कई बार हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने कई आतंकियों को गिरफ्तार भी किया है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो पिछले तीन दशक में दर्जनों खतरनाक आतंकी भारत-नेपाल सीमा पर दबोचे जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां अपनी हर रिपोर्ट के भारत-नेपाल सीमा को अति संवेदनशील बता चुके हैं। भारत का मित्र देश नेपाल आतंकियों के लिए मुफीद साबित हो रहा इस बात की तस्दीक 1991 में हुई जब सोनौली बॉर्डर पर पंजाब का उग्रवादी सुखविंदर सिंह दबोचा गया।
सिद्धार्थनगर के बढ़नी में भारत-नेपाल सीमा पर अजमेर सिंह व भाग सिंह नामक उग्रवादी पकडे गये। 1993 में मुंबई कांड का आरोपी टाइगर मेमन भी सोनौली बॉर्डर पर ही दबोचा गया। इनके अलावा नेपाल से अपनी गतिविधियां संचालित करने वाले पाकिस्तानी आतंकी जब्बार को एटीएस ने लखनऊ में पकड़ा था। जब्बार भी नेपाल सीमा के रास्ते ही भारत के घुसा था लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया।
यही नहीं बब्बर खालसा का खतरनाक उग्रवादी मक्कन सिंह बढ़नी (सिद्दार्थनगर) में पकड़ा गया था। भारत-नेपाल सीमा पर ही देश के लिए खतरा बने टॉप आतंकियों में शुमार अब्दुल करीम टुंडा को दिल्ली पुलिस ने दबोचने में कामयाबी हासिल की थी। फिर इंडियन मुजाहिद्दीन का खूंखार सिपहसलार यासीन भटकल नेपाल की सीमा पर पकड़ा गया। अक्टूबर 2016 में डॉ.जावेद नामक एक संदिग्ध पाकिस्तानी पकड़ा गया था। बीते 13 मई 2017 को हिजबुल आतंकी नासीर अहमद वानी को गिरफ्तार किया गया। उसका दोस्त भागने में सफल रहा। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना का एक अफसर भी लापता हो गया था नेपाल से। आशंका जताई जा रही वह नेपाल या भारत में कहीं छुपा हो और आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहा हो।

इंडियन मुजाहिद्दीन की नींव नेपाल के इस होटल में पड़ी थी

सुरक्षा एजेंसियों की माने तो नेपाल में आईएसआई ने काफी जाल बिछा रखा है। इस पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने ही भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित करने के लिए इंडियन मुजाहिद्दीन नाम के आतंकी संगठन का गठन कराया था। इसका गठन नेपाल में स्थित हिमालयन होटल में किया गया था। बॉर्डर पर पकड़ा गया आईएम का यासीन भटकल ही सर्वेसर्वा था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार लश्कर-ए-तैय्यबा और जैश-ए-मोहम्मद आईएम को पूरा सहयोग भारत में आतंक फैलाने और गतिविधियां संचालित करने में करती हैं। यासीन भटकल पर 10 लाख का इनाम भी था।

भारत-पाकिस्तान की 1751 किलोमीटर खुली सीमा वजह

आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले पाकिस्तान के लिए 1751 किमी में खुली भारत-नेपाल की सीमा सबसे मुफीद साबित हो रही है। यही वजह है कि अब आतंकी बाघा या अन्य बॉर्डर की बजाय इस रूट को ज्यादा तरजीह दे रहे। सुरक्षा एजेंसियों की माने तो ये आतंकी आसानी से पाकिस्तान से दुबई पहुंचते फिर वहां से काठमांडू। काठमांडू से भारत की ओर आते और दोनों देशों की खुली सीमा से घुसने की कोशिश करते। कुछ कामयाब भी हुए जबकि कई पकड़े भी जा चुके हैं।