सुत्रो की माने तो बागपत जेल में सुनील राठी का दबदबा था। जेल में गैरकानूनी कार्य भी होते थे। बताया जाता है कि तन्हाई बैरक के बावजूद भी उसका सभी कैदियों के बीच में हस्तक्षेप था। उसके खिलाफ कोई कैदी बोलता था तो उसे चुप करा दिया जाता है। जेल में शराब, शबाब से लेकर नशे के सामने इंताजाम थे। एसटीएफ की माने तो सुनील राठी जेल में पहले से पिस्टल रखता था। पहले से ही जेल में हथियार रखवाएं गए थे। पिस्टल मुन्ना बजरंगी की नहीं, बल्कि जिसके बल पर वह जेल में हुकुमत करता है। उसका खौफ जेल के बंदी रक्षक नहीं जेलर भी खाते थे। गुर्गो की वजह से जेल अधिकारी भी उससे कुछ नहीं बोल पाते थे। यहीं वजह है कि कानून को ताक पर रखकर जेल मेंं खेल खेला जा रहा था।