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Breaking news : लोकायुक्त टीम की छापामार कार्रवाई, रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए अफसर

दो लाख में तय हुआ था मामला....
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गुना

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KRISHNAKANT SHUKLA

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Updated: 22 Nov 2018, 2:36 PM IST

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Breaking news : लोकायुक्त टीम की छापामार कार्रवाई, रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए अफसर

गुना मोहर सिंह लोधी की रिपोर्ट...
भोपाल। मध्यप्रदेश के गुना जिले में समर्थन मू्ल्य पर उड़द ना खरीदने को लेकर 19 तारीख को हुई शिकायत मामले में लोकायुक्त की टीम ने गुरुवार को छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान उप पंजीयक सहकारिता केके द्विवेदी एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए।

19 तारीख को की थी शिकायत...

मिली जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर उड़द ना खरीदने को लेकर समिति प्रबंधक शंकर सिंह रघुवंशी ने सहायक को प्रभार सौंपने के लिए बीते 19 तारीख को पत्र लिखा था। जिसके बाद उप पंजीयक सहकारिता केके द्विवेदी ने संतोष प्रजापति प्रभारी नियुक्त करने के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।

रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा...
लेकिन सौदा डेढ़ लाख में तैयार हुआ। गुरुवार को लोकायुक्त टीआई कवींद्र चौहान सहित उनकी टीम ने उप पंजीयक सहकारिता केके द्विवेदी को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। जानकारी के अनुसार समिति प्रबंधक शंकर रघुवंशी बरखेड़ा गिर्द के प्रबंधक हैं।


दो दिन पहने भी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकडे गए अधिकारी...

दो दिन पहले मध्यप्रदेश में रिश्वत के दो मामले सामने आए थे। पहला मामला राजधानी भोपाल का था। जहां लोकायुक्त पुलिस ने एक वाणिज्यिक कर विभाग के सहायक आयुक्त विशाल मेधा को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। वहीं, दूसरा मामला दमोह जिले का है.

जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर और सहायक को दस हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जानकारी के अनुसार राजधानी भोपाल में वाणिज्यिक कर सहायक आयुक्त विशाल मेधा ने एक पेट्रोल पंप संचालक से पचास हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। असल में सीहोर निवासी दीपक कोरी का टैक्स संबंधित मामला चल रहा है।

कोरी का आष्टा में पेट्रोल पंप है। उनके पंप की ऑडिट रिपोर्ट को मंजूर करके टैक्स का निर्धारण होना था. लेकिन सहायक आयुक्त ने इस मामले को निपटाने के लिए कोरी से दो लाख की रिश्वत मांगी थी। इस रकम को दो किस्तो में देने का सौदा तय हुआ था।

दीपक ने इसकी शिकायत भोपाल लोकायुक्त पुलिस से की जिसके बाद रणनीति के तहत दीपक को पहली किस्त के साथ मेधा के पास भेजा गया। जैसे ही दीपक ने यह रकम सहायक आयुक्त को दी लोकायुक्त ने उन्हें 50 हजार रुपए लेते रंगेहाथों पकड़ लिया था।